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Shimla News: हिमपात के बाद जमीन में भरपूर नमी पर सेब के पौधों की कमी

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मशोबरा ब्लॉक के बागवानों तैयार नहीं कर पा रहे नए बगीचे, पौधों का है इंतजार
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बारिश और बर्फबारी से नए पौधों की आपूर्ति प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के मशोबरा विकास खंड में उद्यान विभाग की ओर से अभी तक सेब और स्टाेन फ्रूट के पौधों की सप्लाई नहीं पहुंचाई गई। जमीन में नमी होने के बावजूद बागवानों को नए पौधों की रोपाई के लिए उद्यान विभाग की सप्लाई का इंतजार है।

मशोबरा विकास खंड के लिए 700 प्लांट सेब के पौधों की सप्लाई करसोग से आएगी। इसके तुरंत बाद बागवानों को पहले आओ पहले पाओ के आधार पर इनकी बिक्री शुरू हो जाएगी। उद्यान विभाग की उपनिदेशक सुदर्शना नेगी ने बताया कि बारिश और बर्फबारी होने के तुरंत बाद बागवानों की मांग बढ़ गई है। रास्ते बंद होने के चलते अभी बगावानों को पौधों के लिए चार से पांच दिन का इंतजार करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि जिला शिमला में इस वर्ष 70 से 80 हजार सेब, स्टोन फ्रूट पौधों की मांग आई थी। इसमें कुल्लू जिले के बिजौरा स्थित और अणु स्थित नर्सरी से 50 फीसदी से अधिक सेब के पौधे बिक गए हैं। इसके अलावा सीडलिंग से और किवी के पौधे, स्टोन फ्रूट और पर्सिमोन (जापानी फल) के पौधे बिकने अभी बाकी हैं। मशोबरा विकास खंड से भी अधिकतर बागवानों ने यहां से पौधे ले लिए हैं। वहीं अन्य बागवानों को पांच दिन तक मशोबरा विक्रय केंद्र पर पौधे उपलब्ध करवा दिए जाएंगे।
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बागवानी पर निर्भर हैं हजारों परिवार
गौरतलब है कि शिमला जिले के हजारों परिवार बागवान पर निर्भर हैं। हर साल जिले में करोड़ों रुपये सेब और अन्य फलों का कारोबार होता है। यही नहीं सेब कारोबार शुरू होने पर हजारों लोगों को इसमें रोजगार भी मिलता है। बाहरी राज्यों से हर वर्ष सैकड़ों मजदूर काम करने के लिए बगीचों में आते हैं लेकिन पौधे न मिलने के कारण अभी काम बंद पड़ा है। हिमपात के बाद जमीन में नमी अच्छी होती है। ऐसे में बागवान इस मौसम को पौधे लगाने के लिए अच्छा माना जाता है।

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