राज्य और केंद्र सरकार की ओर से की जा रही सब्सिडी में कटौती से सेब उत्पादन की लागत में भारी बढ़ोतरी हो रही है, जिससे सेब बागवान संकट में हैं। चंडीगढ़ में शुरू हुए एपल फार्मर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के दो दिवसीय अखिल भारतीय अधिवेशन के पहले दिन सेब उत्पादन की चुनौतियों पर चर्चा हुई। फेडरेशन के संयोजक सोहन सिंह ठाकुर ने बताया कि सेब बागवानों के सामने आजीविका बचाने की चुनौती है। सेब के लिए समर्थन मूल्य, अनुदान और विपणन की बेहतर व्यवस्था जरूरी है। अधिवेशन में तीन राज्यों के 80 से अधिक बागवान प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
खाद और कीटनाशकों की महंगाई से दोगुना हुई सेब उत्पादन की लागत, सेब के आयात शुल्क में कटौती सहित अन्य मुद्दों पर अधिवेशन में चर्चा होगी और आगामी रणनीति तय होगी। सोहन सिंह ठाकुर ने कहा कि बागवानों के लिए सेब की बागवानी घाटे का सौदा बन गई है। बागवानों के हित ताक पर रखकर सरकारें कॉरपोरेट कंपनियों के इशारों पर काम कर रही हैं। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले हिमाचल, कश्मीर और उत्तराखंड के बागवानों का अधिवेशन आयोजित हो रहा है, जिसमें आगामी रणनीति तय की जाएगी।