शिकायतकर्ता कृष्णा शर्मा ने वर्ष 2018 में मलिका सूद के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के अनुसार आरोपी ने उनसे लिए ऋण के भुगतान के बदले 2,50,000 रुपये का चेक दिया था। चेक को जब बैंक में लगाया तो यह बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद आरोपी ने भुगतान नहीं किया जिसके बाद मामला अदालत पहुंचा। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-एक शिमला की अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर मलिका सूद को दोषी करार दिया था तथा छह महीने के साधारण कारावास और 3,75,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
इस फैसले के खिलाफ मलिका सूद ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर होने से इन्कार नहीं किया था। कानून के तहत जब हस्ताक्षर निर्विवाद हों तो यह माना जाता है कि चेक कानूनी देयता के निर्वहन के लिए ही जारी किया था। संवाद