सेब सीजन के दौरान बाहरी राज्यों के सेब खरीदारों पर सरकार ने शिकंजा कस दिया है। अब सेब लदानियों का पंजीकरण संबंधित आढ़तियों के जिम्मे रहेगा। अगर लदानी सेब खरीदकर गायब होता है और माल का भुगतान नहीं करता है तो ऐसी स्थिति में संबंधित आढ़ती से बकाया धनराशि की वसूली की जाएगी।
बागवानों को चूना लगाकर गायब होने वाले बाहरी राज्यों के लदानियों पर इस बार शिकंजा कस दिया है। सरकार की ओर से जारी निर्देशों के बाद इस व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाएगा। नई व्यवस्था में सेब की खरीदारी के लिए बाहरी राज्यों से आने वाले लदानियों का पंजीकरण उसी आढ़ती को करना होगा, जिसके माध्यम से बागवान सेब बेचेगा।
आढ़तियों को लदानियों का पंजीकरण कराने के साथ उसके नाम और पते की वेरिफिकेशन भी अपने स्तर पर ही करानी होगी। लदानी के नाम और पते की वेरिफिकेशन करने के बाद संबंधित क्षेत्र के एसपी को इसकी सूचना भी देनी होगी। इसके बाद भी अगर लदानी बागवान से सेब खरीदने के बाद गायब होता है तो पहले उसकी छानबीन की जाएगी।
अगर लदानी पकड़ में नहीं आता है तो फिर स्थानीय आढ़ती से बकाया राशि की वसूली की जाएगी। एपीएमसी शिमला किन्नौर के सचिव देव राज कश्यप कहते हैं कि लदानियों के नाम पते की पुष्टि संबंधित आढ़ती को करनी होगी। इसके बाद संबंधित क्षेत्रों के एसपी को भी यह जानकारी उपलब्ध करानी होगी। उनका कहना है कि अगर लदानी सेब का भुगतान न करके गायब होता है तो रिकवरी संबंधित आढ़ती से की जाएगी।