बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए सरकार ने 65 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान से मुख्यमंत्री बाल सुपोषण योजना शुरू करने की घोषणा की है। सरकार ने सात स्तंभों पर स्थापित इस योजना को शुरू करने का फैसला लिया है। इसके अलावा 12207 आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल बनाने और एक हजार आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए अपने भवन निर्माण करने की घोषणा भी की गई है। बाल-बालिका आश्रमों से निकले बच्चों को स्वरोजगार के लिए 35 हजार रुपये का अनुदान देने का भी बजट में प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल से चर्चा करने के बाद एक्शन प्लान बनाया गया है। इसमें बच्चों की शारीरिक वृद्धि में दो मूल बीमारियों डायरिया और निमोनिया का जल्द पता लगाकर उसका सही उपचार किया जाएगा।
कम वजन वाले नवजात शिशु और कुपोषण से संभावित प्रभावित होने वाले बच्चों के स्वास्थ्य की गहन निगरानी व सतत समीक्षा की जाएगी। पूरक पोषाहार के लिए उपयुक्त प्रोटीन युक्त आहार दिया जाएगा। बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं में एनीमिया के उपचार के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। उच्च रक्तचाप और एनीमिया से पीड़ित गर्भवती और धात्री की समय रहते पहचान और उपचार किया जाएगा। कुपोषित बच्चों का सही उपचार किया जाएगा। यह योजना भारत और राज्य सरकार के सहयोग से चलाई जाएगी। इसमें महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा विभाग में तालमेल बिठाया जाएगा। दो माह के भीतर इसकी समीक्षा की योजना तैयार की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 18925 आंगनबाड़ी केंद्रों में से सिर्फ 2138 केंद्र विभागीय भवनों में चल रहे हैं। 70 करोड़ के बजट से एक हजार और केंद्रों के लिए भवन निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 6718 आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल केंद्रों के तौर स्थापित कर दिया गया है। अब 12207 केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से मॉडल बनाया जाएगा। इसके लिए 32 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। मॉडल केंद्रों में स्लाइड, स्विंग, ब्लू मॉडल बेबी टेबल, कुर्सी की सुविधा दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेसहारा बच्चों के पुनर्वास तथा उन्हें शिक्षा प्रदान करने के लिए एक नई मुख्यमंत्री असहाय बाल पुनर्वास योजना शुरू की जाएगी। बाल देखभाल संस्थान, जिला बाल संरक्षण इकाइयां, वृद्ध आश्रम में कार्यरत विभिन्न श्रेणियों के कर्मियों को दिए जाने वाले मानदेय में एकरूपता लाने के लिए राज्य सरकार से टॉप अप का प्रावधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक नई पहल करते हुए वर्ष 2022-23 में एक अलग से जैंडर बजट स्टेटमेंट भी तैयार की गई है। इसमें महिलाओं सशक्तीकरण के लिए चलाई जा रही योजनाओं की समीक्षा की जाएगी।
12 हजार लोगों के 12 करोड़ ऋण की होगी वन टाइम सेटलमेंट
शिमला। अनुसूचित जाति और जन जाति विकास निगम से लिए गए कर्जों के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना की समय सीमा को बढ़ाया जाएगा। अभी तक एक हजार से अधिक लोगों ने इस योजना का लाभ लिया है। योजना की समय अवधि बढ़ने से 12 हजार से अधिक लोगों के लिए 12 करोड़ की ब्याज और जुर्माना राशि की सेटलमेंट हो पाएगी।
विधवा पुनर्विवाह योजना में मिलेगा 65 हजार अनुदान
शिमला। प्रदेश सरकार ने पुनर्विवाह को प्रेरित करने के लिए विधवा पुनर्विवाह योजना में 65 हजार अनुदान देने की घोषणा की है। योजना में अभी तक 50 हजार रुपये की अनुदान राशि प्रति दंपती देने का प्रावधान है।