बर्फीले तूफान और कड़ाके की ठंड के बीच एक एंबुलेंस करीब 11 घंटे तक फंसी रही। महिला मरीज जिंदगी के लिए घंटों तड़पती रही। मगर न तो एंबुलेंस बर्फ से बाहर निकल पाई और न ही प्रशासन मौके पर पहुंचा। आखिरकार महिला जिंदगी की जंग हार गई। मामला हिमाचल के रोहतांग का है। यहां देर रात एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार पिछले कुछ दिनों से ढुलमुल स्वास्थ्य सुविधाओं की मार झेलती रही एक मरीज महिला शुक्रवार को करीब 11 घंटे तक रोहतांग में बर्फ के बीच तड़पती रही। शून्य से करीब 10 डिग्री तापमान के बीच यह महिला समुद्र तल से 13050 फुट की ऊंचाई पर जिंदगी के लिए तिल तिल मरती रही। मगर प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं पहुंची।
85 घंटे पहले किया गया था रैफर
किडनी की बीमारी और हाई क्लॉस्ट्रोल से पीड़ित 45 वर्षीय भागदासी पिछले कुछ दिनों से केलांग अस्पताल में उपवचाराधीन थी। लेकिन मरीज की गंभीर और बिगड़ती हालात को देखते हुए डाक्टरों ने भागदासी को बुधवार को उपचार के लिए कुल्लू रैफर कर दिया। उनका ईलाज कर रहे डॉ. अमित ने बताया कि महिला को जल्द बेहतर उपचार की जरूरत है लिहाजा उन्हें कुल्लू रैफर किया गया।
शुक्रवार सुबह मौसम खुलने के बाद 108 एंबुलेंस से उसे कुल्लू रवाना किया गया। लेकिन रोहताग दर्रा में बर्फीली तूफान चलने के कारण सड़क पर कई फुट मोटी बर्फ की परत जम गई। लिहाजा 108 एंबुलेंस के साथ कुछ और टेक्सियां भी रोहतांग दर्रे में बफीली तूफान के बीच 15 घंटे तक फंसे रहे। हालांकि सीमा सड़क संगठन ने कड़ी मशकत के बाद रोहतांग में ट्रैफिक बहाल तो कर दिया लेकिन नीचे व्यास नाला के पास सड़क पर बर्फ की परत जम जाने से सड़क मार्ग फिर बंद हो गया।
अस्पताल पहुंची मगर नहीं बचाई जा सकी जान
रात करीब डेढ़ बजे जाकर मरीज महिला समेत अन्य यात्री को व्यास नाला से निकाला जा सका। इन्हें अब मनाली पहुंचा दिया गया। मगर यहां अस्पताल में उपचार मिलने से पहले ही महिला ने दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि महिला की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई।
उधर, प्रशासन पर ही लापरवाही के सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि लाहौल की ओर से बिना सूचना दिए मनाली की ओर गाड़ियां रवाना की गई। जबकि रास्ते में बर्फ गिरने के कारण ये वहां फंस गई। रात करीब नौ बजे मनाली प्रशासन को इसकी सूचना मिली जिसके बाद मौके पर जाकर महिला मरीज और अन्य लोगों को मनाली पहुंचाया गया।
यदि लाहौल प्रशासन की ओर से मनाली प्रशासन को एंबुलेंस रवाना होने की सूचना दी जाती तो महिला की जान बच सकती थी। मगर देरी से सूचना मिलने के कारण महिला की जान नहीं बचाई जा सकी। उधर, बीआरओ के जवान लगातार यातायात बहाल करने के लिए मशक्कत कर रहे हैं।