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Shimla: मेधावी छात्र सम्मान समारोह में दादा-दादी के साथ मुख्यमंत्री से मेडल लेने पहुंचीं टॉपर बेटियां

Fri, 07 Oct 2022 05:41 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

हमीरपुर की रहने वाली ईरा ठाकुर अपने दादा प्रेम सिंह ठाकुर के साथ समारोह में पहुंची थीं। दसवीं कक्षा में दसवां रैंक हासिल करने वाली ईरा के पिता अमित ठाकुर और मां वंदना ठाकुर दोनों शिक्षक हैं। 
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दादा-दादी के साथ मुख्यमंत्री से मेडल लेने पहुंचीं टॉपर बेटियां - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मेडल हासिल करने के लिए कई होनहार बेटियां अपने दादा और दादी के साथ शिमला पहुंचीं। मेडल पाकर ये बेटियां बेहद खुश थीं तो मुख्यमंत्री के हाथों पोतियों को मिले सम्मान से इनके दादा-दादी गौरवान्वित महसूस कर रहे थे। हमीरपुर की रहने वाली ईरा ठाकुर अपने दादा प्रेम सिंह ठाकुर के साथ समारोह में पहुंची थीं। दसवीं कक्षा में दसवां रैंक हासिल करने वाली ईरा के पिता अमित ठाकुर और मां वंदना ठाकुर दोनों शिक्षक हैं।

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ईरा ने बताया कि माता-पिता को छुट्टी नहीं मिली तो दादा को साथ लेकर शिमला पहुंच गईं। दादा प्रेम सिंह ठाकुर ने बताया कि वह खुद सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। पोती को सीएम के हाथों मेडल पहनते देखना बड़ी बात है। ऊना के नकी गांव की रहने वाली वंशिका चौधरी भी अपनी 67 वर्षीय दादी सरोज रानी और पिता हरीश कुमार के साथ टैक्सी कर शिमला पहुंची थीं। वंशिका ने 12वीं नॉन मेडिकल की परीक्षा में दसवां रैंक हासिल किया है। बताया कि सम्मान समारोह में टॉपरों के साथ मेडल लेना अच्छा लगा। समारोह के साथ शिमला घूमने का भी मौका मिला है। वंशिका अब एनडीए की कोचिंग ले रही हैं।

बेटे की जगह शिक्षक पिता ने लिया सम्मान
12वीं कॉमर्स की परीक्षा में प्रदेश भर में सातवां रैंक हासिल करने वाले घणाहट्टी के आदित्य की जगह उनके पिता बलदेव राज ने मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान हासिल किया। पेशे से जेबीटी शिक्षक बलदेव राज ने बताया कि बेटा देहरादून से बीबीए की पढ़ाई कर रहा है। शुक्रवार को आदित्य की प्रेजेंटेशन थी, इसलिए समारोह में नहीं पहुंच पाया। बेटे की जगह खुद आने का फैसला लिया। कहा कि बेटे के कारण आज उन्हें सीएम ने मेडल पहनाकर सम्मानित किया। यह गर्व की बात है। बताया कि बेटे ने दसवीं कक्षा में भी दसवां रैंक हासिल किया था। उस समय कोरोना के चलते यह समारोह नहीं हुआ, जिसका मलाल था, लेकिन अब यह मलाल भी दूर हो गया।

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