अग्निहोत्री ने कहा कि वह शिक्षा मंत्री को कहेंगे कि जहां पर 100 बच्चे हैं, वहां कॉलेज बंद न करें। सबसे ज्यादा फायदा स्कूल और कॉलेज खुलने से हुआ तो वह लड़कियों को हुआ है। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी एनआईटी हमीरपुर और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर बीसीएस से पढ़े हैं। शिक्षा मंत्री के रहते हुए रोहित ठाकुर ने भी क्रांतिकारी कदम उठाए रहे हैं। मुकेश बोले - तकनीकी शिक्षा मंत्री को भी वह कहना चाहेंगे कि वह डिजिटल यूनिवर्सिटी खोलें, डिजिटल पार्क बनाएं। उनके निर्वाचन क्षेत्र हरोली में एक बल्क ड्रग पार्क बन रहा है। 50 हजार युवाओं को इसमें नौकरियां मिलेंगी।
अग्निहोत्री ने कहा कि अभिभावक बच्चों को समय दें। सरकारी स्कूलों में भी कार्यक्रमों में माता-पिता दोनों को बुलाया जाना चाहिए। उनकी बेटी को जब इनाम मिलना था तो वह उस कार्यक्रम में नहीं जा सके। वह आज दिन तक कहती है कि वोट के लिए समय है, पर उसके लिए नहीं।
अग्निहोत्री ने कहा कि डॉ. वाईएस परमार ने हिमाचल प्रदेश को बनाया तो वीरभद्र सिंह ने विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया। दोनों दो-दो दशकों तक मुख्यमंत्री रहे। दोनों के योगदान को नहीं भुला सकते। वीरभद्र सिंह के समय उन्होंने 35 डिग्री कॉलेज खोले। उनके हरोली निर्वाचन क्षेत्र में एक भी डिग्री कॉलेज नहीं था, लेकिन आज वहां पर तीन डिग्री कॉलेज, दो आईटीआई, एक केंद्रीय विद्यालय, एक लॉ कॉलेज है।
मुकेश बोले कि अमर उजाला बहुत अच्छा काम कर रहा है। खबरों की दुनिया में क्या चल रहा है। इसके लिए अमर उजाला सर्वश्रेष्ठ समाचार पत्र है। फेक न्यूज के इस दौर में अमर उजाला की खबरों पर भरोसा किया जा सकता है। अमर उजाला की विश्वसनीयता पूरे देश में है। अगर विश्वसनीय खबर पढ़नी है तो अमर उजाला पर भरोसा किया जा सकता है। मुकेश ने कहा कि बच्चों को भी सोशल मीडिया ही नहीं देखना चाहिए, अखबारों की दुनिया से भी अपना वास्ता रखना है। आजकल फेक न्यूज का वातावरण बना हुआ है। पता ही नहीं चलता कि क्या सच्चाई है। ऐसी भीड़ में आप अमर उजाला पर विश्वास कर सकते हैं। खबरों की दुनिया में सच में क्या चल रहा है, उसके लिए अमर उजाला हिंदी का बेस्ट पेपर है।
अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान समारोह में उस समय रोचक माहौल बन गया, जब एक मेधावी छात्रा ने सम्मान प्राप्त करते हुए मंच पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से सवाल पूछ लिया कि आईएएस बनने के लिए परीक्षा देनी पड़ती है, लेकिन विधायक (एमएलए) बनने के लिए ऐसी कोई परीक्षा क्यों नहीं होती। छात्रा ने कहा, सर, आईएएस बनने के लिए एग्जाम होता है तो एमएलए बनने के लिए क्यों नहीं? जब आप संबोधन करेंगे तो इसका जवाब जरूर बताइएगा। अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री ने छात्रा के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि लोकतंत्र में विधायक बनने के लिए भी परीक्षा देनी पड़ती है, लेकिन यह परीक्षा लिखित नहीं होती। हमारा हर पांच साल में एग्जाम होता है। लोकतंत्र में लाखों लोग हमारा एग्जाम लेते हैं। अगर जनता हमें पास कर देती है तो हम विधायक बन जाते हैं और अगर फेल कर देती है तो बाहर हो जाते हैं। उपमुख्यमंत्री के इस जवाब पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी शक्ति होती है और जनप्रतिनिधियों की असली परीक्षा जनता के बीच उनके कार्यों और जवाबदेही के आधार पर होती है।
अमर उजाला मेधावी सम्मान समारोह में शनिवार को उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने मेधावी विद्यार्थियों से संवाद कर उनके जीवन के लक्ष्यों और सपनों के बारे में जाना। इस दौरान उस समय रोचक पल देखने को मिला, जब वैशाली ने उपमुख्यमंत्री से पूछा, आपने पहचाना मुझे? इस पर मुकेश अग्निहोत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, हां, मैं तुम्हारे घर आया था। दरअसल, प्लस-टू परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद चार मई को उपमुख्यमंत्री वैशाली के घर उसे बधाई देने पहुंचे थे। सेना से सेवानिवृत्त अधिकारी की बेटी वैशाली ने बताया कि उसका लक्ष्य सिविल सेवाओं में जाकर देश की सेवा करना है।
बिलासपुर की प्रकृति शर्मा ने बताया कि वह दूसरी बार अमर उजाला मेधावी सम्मान से सम्मानित हुई हैं। वह नीट की तैयारी कर रही हैं और भविष्य में चाइल्ड स्पेशलिस्ट चिकित्सक बनना चाहती हैं। हमीरपुर की मोली ठाकुर ने कहा कि पिता नौसेना और दादा सेना से सेवानिवृत्त हैं और उनका सपना सिविल सेवाओं में जाना है। सिरमौर के शिलाई निवासी रुद्र प्रताप चौहान ने इंजीनियर बनने और उसके बाद राजनीति में आने की इच्छा जताई। वहीं शिमला के घणाहट्टी के प्रताप मेहता ने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान जेईई मेन्स की तैयारी पर है। उपमुख्यमंत्री ने सभी विद्यार्थियों को उनके लक्ष्यों के लिए शुभकामनाएं दीं और निरंतर मेहनत करने का संदेश दिया।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि हर वर्ष अमर उजाला दसवीं और जमा दो कक्षा के टॉपर को सम्मानित करता है, इस तरह के आयोजन से छात्रों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। आज के इस बदलते युग में छात्र अपने कॅरिअर का चयन सोच समझकर करने की जरूरत है। विश्वभर में टेक्नोलॉजी के बदलाव के समय में सोशल साइंस, एआई और अन्य ऐसे क्षेत्र विकसित हुए है, जिनसे भविष्य बनाने की अपार संभावनाएं हैं। छात्र होड़ में न चलें। भविष्य और लक्ष्य का चयन करने में मंथन करें।