आर्ट ऑफ लिविंग संस्था प्रदेश में टीकाकरण की भ्रांतियां दूर करने को लेकर बच्चों को जागरूक कर रही है। आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षक छात्रों को प्रार्थना सभा में बता रहे हैं कि अगर उन्हें कहीं घूमने जाना है तो पहले टीका लगवा लें। टीका लगने से जहां वह बीमारी से सुरक्षित रहेंगे वहीं बीमार होने की संभावना भी कम हो जाएगी। इसके साथ बच्चों को मास्क लगाने का महत्व भी बताया जा रहा है।
आर्ट ऑफ लिविंग की राज्य मीडिया प्रभारी तृप्ता शर्मा ने बताया कि संस्था अब तक 40 से अधिक स्कूलों में जागरूकता अभियान चला चुकी है। राजधानी शिमला समेत ब्लॉकों में रोजाना हजारों की तादाद में बच्चों की वैैक्सीनेशन की जा रही है। इनमें 12 से 14 साल के छात्रों को टीके लगाए जा रहे हैं। स्कूलों के अलावा अस्पतालों के वैक्सीनेशन केंद्रों में बच्चे टीका लगवा रहे हैं। औसतन 100 से 120 बच्चों को हर रोज केंद्रों पर टीके लगाए जा रहे हैं।
पापा से प्रेरित हुई, लगा ली दोनो वैक्सीन
केंद्रीय विद्यालय स्कूल की छात्रा नीलाक्षी ने बताया कि उनके पिता पुलिस विभाग में वरिष्ठ अधिकारी के पीएसओ हैं। फ्रंट लाइन वर्कर होने के नाते पिता जी को कोरोना का टीका पहले लगा। पापा से प्रेरित होकर ही उन्होंने बेझिझक टीका लगाया। अब वह दोस्तों को भी जागरूक कर रही है।
दोनों बेटियों को लगवाए टीके : सुरेंद्र
पंचायत थड़ी के गांव सलाना के सुरेंद्र कुमार डीडीयू अस्पताल में अपनी दो बेटियों को टीकाकरण के लिए लाए थे। उन्होेंने बताया कि अब पूरा परिवार बीमारी से सुरक्षित हो गया है। बताया कि मेरे गांव में बच्चों से बड़ों तक सभी लोगों ने कोरोना की दोनों डोज लगवा ली हैं।
बच्चों को ध्यान लगाकर किया जागरूक : तृप्ता
आर्ट ऑफ लिविंग की राज्य मीडिया प्रभारी तृप्ता शर्मा ने कहा कि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के मन में वैक्सीन को लेकर द्वंद्व चल रहा था। इसे दूर करने के लिए बच्चों को योग और ध्यान जैसी क्रियाएं करवाई गईं। इससे वैक्सीन को लेकर नकारात्मक विचार खत्म हो जाते हैं।