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आइए छेड़ें देवभूमि में नशे के सौदागरों के खिलाफ नई जंग

Fri, 06 May 2016 11:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला

सार

  • काले कारोबार पर अंकुश लगाने को ‘अमर उजाला’ करेगा पहल
  • लोगों संग मिलकर करेंगे नशे के कारोबार को खत्म करने का प्रयास
  • हर साल बढ़ रहा नशे का ग्राफ, खानापूर्ति कर जिम्मेदारी से बच रहे जिम्मेदार
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‘अमर उजाला’ इस मसले को गंभीरता से उठाने जा रहा है।
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विस्तार
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हिमाचल नशे की गिरफ्त में है। नशे के सौदागर स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों को अपना निशाना बना रहे हैं। अभिभावक परेशान हैं। नशे के ये सौदागर स्कूल, कॉलेजों के आसपास सक्रिय हैं। लेकिन पुलिस इन पर शिकंजा नहीं कस पा रही। उधर, प्रदेश के तमाम जिलों में जंगलों के बीच चोरी से भांग, अफीम और चरस की खेती की जा रही है।
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इनसे नशीले पदार्थ बनाए जा रहे हैं। लेकिन प्रदेश सरकार ने इस समस्या को अब तक गंभीरता से नहीं लिया। सूबे के राज्यपाल देवव्रत ने इस सिलसिले में सख्ती दिखाई थी लेकिन अफसरों ने उनकी मुहिम को राजनीतिक रंग देकर ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब सामाजिक सरोकार से जुड़ा आपका ‘अमर उजाला’ इस मसले को गंभीरता से उठाने जा रहा है।

हमारी टीम प्रदेश भर में नशे के इस कारोबार की गहनता से पड़ताल करेगी। और सच सामने लाएगी। इस मुहिम में हमेशा की तरह आप भी हमारा साथ दें। हमारे व्हाट्स नंबर पर नशे के कारोबार से जुड़ी कोई जानकारी हो तो हमसे शेयर करें। हम आपका नाम गोपनीय रखेंगे। हम सबका मकसद इस बुराई को जड़ से खत्म करना है। इस पावन कार्य में आप हमारा साथ दें। -संपादक
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तमाम दावों और करोड़ों रुपये खर्चने के बावजूद साल दर साल हिमाचल में नशे का कारोबार फैलता जा रहा है। हालत यह है कि भारत में नशे के लिए बदनाम स्थानों में हिमाचल का भी नाम शामिल हो गया है। हिमाचल को अब भारत में नशे के गोल्डर ट्रैंगल के रूप में देखा जाता है जिसमें हिमाचल के अलावा गोवा और मध्यप्रदेश के पुष्कर का नाम शामिल है।

हिमाचल में तेजी से पनप रहे नशे के जाल में हिमाचल के हर वर्ग का युवा फंसता जा रहा है। स्कूल से लेकर कॉलेजों तक नशे की लत वाले युवा आसानी से दिख जाते हैं। तस्कर भी हेडलाइट से लेकर बर्फ और घी तक में विभिन्न तरह के नशीले उत्पाद हिमाचल में ला और ले जा रहे हैं। नशे से सिर्फ नशा करने वाला या उसके परिवार वाले ही नहीं बल्कि समाज के अन्य लोग भी परेशान हो रहे हैं। नशे के इस चलन से जहां सड़क हादसों में इजाफा हुआ है, वहीं अपराध का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा है।

नशे पर काबू पाने के लिए सरकार भी हर साल करोड़ों रुपये जागरूकता और कार्रवाई के नाम पर खर्च करती है लेकिन नतीजा सिफर ही है। सरकारी कार्रवाई भी सरकारी शैली में होने की वजह से नशे के सौदागर धीरे-धीरे अपनी जड़ें प्रदेश के शहरों से लेकर सुदूरवर्ती इलाकों तक जमा रहे हैं और सरकार फर्ज अदायगी कर रही है।

जिम्मेदारों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए हिमाचल को नशे के इस जाल से बचाने के लिए अमर उजाला नशे के खिलाफ जंग शुरू करने जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य जहां एक तरफ आम लोगों को जागरूक करने का प्रयास करना रहेगा, वहीं नशे के खिलाफ जंग लड़ने वाले लोगों का सम्मान और जिम्मेदारों के साथ मिलकर नशे के कारोबार पर अंकुश लगाना रहेगा।

चरस से लेकर सिंथेटिक ड्रग का हो रहा इस्तेमाल- हिमाचल में कई तरह के नशे युवाओं को अंदर से खोखला कर रहे हैं। चरस, गांजा, भुक्की और अफीम सरीखे देशी नशे के अलावा ब्राउन शुगर, स्मैक, एलएसडी और हेरोइन जैसे सिंथेटिक ड्रग हिमाचल के गली मोहल्लों में इस्तेमाल हो रहे हैं। इसके अलावा कफ सिरप, एनलजेसिक दवाओं का भी इस्तेमाल हिमाचल में नशे के लिए होता है।

कार्रवाई के नाम पर होती है खानापूर्ति- प्रदेश में हर साल नशे के मामले बढ़ रहे हैं। आंकड़ों को कम रखने के प्रयास के बावजूद जब जब बाहरी एजेंसियां, राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय संगठन और न्यायालय आवाज उठाते हैं, तब शासन-प्रशासन कार्रवाई की खानापूर्ति कर देता है।

कुछ जगह खेती को उखाड़कर वाहवाही भी लूट ली जाती है लेकिन मुख्यमंत्री और सरकार के तमाम वादों, आश्वासनों और चिंताओं के बावजूद इस कारोबार पर कोई असर नहीं दिख रहा।

अभियान में बनें साझीदार- अमर उजाला की नशे के खिलाफ जंग में आप भी अपना सहयोग दे सकते हैं। किसी भी तरह की सूचना, विचार या जानकारी को आप मोबाइल नंबर 97365-97365 पर मैसेज या व्हाट्सएप के जरिये साझा कर सकते हैं।
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