राज्य सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में वर्ष 2026 के दौरान 3336 करोड़ रुपये की लागत वाली 278 मेगावाट क्षमता की 19 जलविद्युत परियोजनाओं के कार्यान्वयन समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन परियोजनाओं के शुरू होने से प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ रोजगार के अवसर सृजित होंगे और राज्य की आय में भी वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री सुक्खू ने ऊर्जा विभाग की इस उपलब्धि की सराहना करते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल की विशाल जलविद्युत क्षमता के दोहन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है, क्योंकि यही क्षेत्र भविष्य में राज्य की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है। जिन परियोजनाओं के लिए समझौते किए गए हैं, उनमें सोयल डाशल, खौली-दो, ग्रामांग, उमली, भरमौर चरण-एक, भरमौर चरण-दो, हरसर चरण-दो, हरसर चरण-तीन, टुंडह चरण-दो, जंगलिक, रूपिन चरण-दो, दुनाली-एक एवं दो, जरी, तोरल कुंडली, टुंडन, कोट डोगरी, अपर कुर्मी, कलाल खोल और मेलन परियोजनाएं शामिल हैं। इन सभी की कुल स्थापित क्षमता 278 मेगावाट है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ऊर्जा नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इसके तहत 25 मेगावाट तक की जलविद्युत परियोजनाओं पर रॉयल्टी की दर को 40 वर्षों के लिए एक समान 12 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे निजी निवेश बढ़ेगा और छोटी तथा मध्यम जलविद्युत परियोजनाओं के विकास में तेजी आएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि 150 मेगावाट क्षमता वाली टिडोंग चरण-एक जलविद्युत परियोजना का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा प्रदेश सरकार अब पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्रों पर भी ध्यान दे रही है। इसी कड़ी में जियोथर्मल ऊर्जा की संभावनाओं के अन्वेषण और विकास के लिए जियो ट्रॉपी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।