हिमाचल प्रदेश के गुम्मा गांव के समीप बुधवार को हुए भीषण बस हादसे में मरे 45 लोगों में से 44 की शिनाख्त हो गई है। एक शव की शिनाख्त नहीं हो सकी है, जिसका डीएनए सुरक्षित रख लिया गया है। शुक्रवार को जरूरी औपचारिकताओं के बाद प्रशासन ने शवों का अंतिम संस्कार कर दिया है।
शुक्रवार को जिन मृतकों की पहचान की गई, उनमें सुमन (17) पुत्री भूना सिंह, संदीप (18) पुत्र भूना सिंह, ललिता (35) पत्नी भूना सिंह, भूना सिंह (40) पुत्र नवल, अमर पुत्र बल बहादुर, वीर बहादुर भंडारी पुत्र धनी भंडारी शामिल हैं। ये सभी मूलरूप से लक्खी मसूर गोरई, नेपाल के निवासी थे, जो मजदूरी की तलाश में यहां आए हुए थे।
हिमाचल प्रदेश के नेरवा थानाध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने बताया कि उत्तराखंड के पौड़ी से आए नेपाली मूल के हरीश और अमर ने शवों की पहचान की। एक शव की पहचान नहीं हो पाई है। उसका चेहरा क्षत-विक्षत हो चुका है जिससे शिनाख्त करना मुश्किल हो रहा है। सभी सात शवों से डीएनए सैंपल ले लिए गए हैं।
प्रशासन ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद नेरवा में सभी का अंतिम संस्कार कर दिया है। इस दौरान एसडीएम चौपाल अनिल चौहान, तहसीलदार चौपाल मनमोहन जिसटु, डीएसपी चौपाल मुनीश डढवाल, होम गार्ड कमांडेंट आरपीण नेप्टा, नायब तहसीलदार नेरवा मोही राम चौहान और नायब तहसीलदार त्यूनी पूर्ण सिंह तोमर भी मौजूद रहे।
थानाध्यक्ष ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त बस के परिचालक तुलसी निवासी सैंज कालसी को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है। दुर्घटना के बाद उग्र भीड़ से कंडक्टर को बचाने के लिए पुलिस अभिरक्षा में लिया गया था।