दिल्ली की तर्ज पर प्रदेश की राजधानी शिमला की आबोहवा दिन प्रतिदिन जहरीली होती जा रही है। दिवाली के बाद हिल्स क्वीन शिमला की हवा में प्रदूषण का स्तर सुरक्षित मानकों से कहीं अधिक बढ़ गया है, जो शहर के लोगों के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है।
प्रदूषण का स्तर बढ़ने से दमा और खांसी की बीमारी की आशंका अलावा दमा के रोगियों के लिए बहुत ही नुकसानदेय है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से दिवाली पर शहर की हवा में मापे गए प्रदूषण के स्तर की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
दिवाली पर हुई आतिशबाजी से इस बार पिछले साल की तुलना में शहर की हवा अधिक प्रदूषित हुई है। दिवाली के बाद शिमला में वायु प्रदूषण का स्तर स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
पिछले साल के मुकाबले इस साल शहर की हवा में आरएसपीएम (रेस्पायरेबल सस्पेंडिड पार्टिकुलेट मैटर) 21.59 यूनिट ज्यादा पाया गया है। बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार पिछली दीवाली पर आरएसपीएम 85 माइक्रो ग्राम प्रति मीटर क्यूब था, जो कि इस दिवाली में बढ़ कर 107.21 पहुंच गया है।
सामने आए चौंकाने वाले आंकड़ें
बोर्ड के वैज्ञानिकों का कहना है कि दिवाली की रात हुई आतिशबाजी और धूल मिट्टी के कारण हवा दूषित हुई है। इस बार दिवाली के अगले दिन शहर में धुंध सामान्य के मुकाबले काफी कम देखी गई, जिससे लोग अनुमान लगा रहे थे कि इस बार पटाखे कम फोड़े गए हैं जिससे प्रदूषण का स्तर घटने से धुंध में कमी आई है, लेकिन इसके विपरीत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में आए आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं।
पिछली दिवाली के मुकाबले ज्यादा प्रदूषण : सूद
प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी संजय सूद ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस दिवाली में आरएसपीएम रेट बढ़ा है। ओल्ड बस स्टैंड में लगाए गए सैंपलर में दीवाली के दिन आरएसपीएम का लेवल 107.21 माइक्रो ग्राम पर मीटर क्यूब मापा गया। लेवल बढ़ने की मुख्य वजह रात को हुई आतिशबाजी है।
यहां जानिए इस बार कितना प्रदूषण बढ़ा
सामान्य दिनों में स्तर - 60 (माइक्रो ग्राम प्रति मीटर क्यूब)
दिवाली पर 2015 में स्तर - 85.62
दिवाली पर इस साल स्तर - 107.21 (ओल्ड बस स्टैंड)
दिवाली पर इस साल स्तर - 65.51 (रिज मैदान)
कैसे और कब बढ़ा शहर की हवा में प्रदूषण
स्थान सैंपल लेने का समय सामान्य दिन दिवाली पर
रिज मैदान सुबह 6 से दोपहर 2 बजे 58.67 45.40
दोपहर 2 से रात 10 बजे 40.39 82.17
रात 10 से सुबह 6 बजे 31.62 68.97
24 घंटों में मापा गया औसतन स्तर 43.56 65.51
ओल्ड बसस्टैंड सुबह 6 से दोपहर 2 बजे 63.78 84.35
दोपहर 2 से रात 10 बजे 62.38 96.59
रात 10 से सुबह 6 बजे 57.93 140.71
24 घंटों में मापा गया औसतन स्तर 61.36 107.21
सांस के मरीजों के लिए खतरे की घंटी
हवा में हानिकारक धूल कणों की मात्रा बढ़ने से शहर में रह रहे सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। इतना ही नहीं हवा प्रदूषित होने के बाद पूरी तरह स्वस्थ लोग भी दमा और खांसी की बीमारी का शिकार बन सकते हैं।
डस्ट पार्टिकल से मापा जाता है प्रदूषण का स्तर
पर्यावरण में प्रदूषण का स्तर डस्ट पार्टिकल (धूल के कणों) से मापा जाता है। प्रदूषण का स्तर मापने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राजधानी शिमला रिज मैदान और ओल्ड बस स्टैंड के पास दो एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सैंपलर लगाए हैं। इन उपकरणों में दिन भर धूल के कण इकट्ठा किए जाते हैं और लैब में इनका आकलन कर रिपोर्ट तैयार होती है।
पटाखों में चारकोल और सल्फर से बढ़ता है प्रदूषण
दिवाली में प्रयोग किए जाने वाले छोटे बड़े सभी पटाखों में बारूद, चारकोल और सल्फर की अत्यधिक मात्रा होती है। पटाखे फोड़ने पर ये पदार्थ चिंगारी और धुएं के रूप में हवा में मिल जाते हैं और पूरे वातावरण को प्रदूषित करते हैं।