बिलासपुर में बनने वाले सबसे बड़े मेडिकल इंस्टीट्यूट (एम्स) के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने और जमीन मांगी है। कोठीपुरा में प्रस्तावित लगभग 200 एकड़ जमीन के साथ ही सटी पशुपालन विभाग की करीब 25 एकड़ और जमीन बिलासपुर आई टीम को पसंद आई है।
मंत्रालय से आए पत्र के आधार पर जिला प्रशासन ने इस भूमि के दस्तावेज तैयार कर भेज दिए हैं। उधर, एम्स निर्माण से पहले भूमि को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नाम हस्तांतरित करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। हिमाचल मंत्रिमंडल द्वारा एम्स के लिए बिलासपुर को फाइनल करने के बाद एक मई 2015 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से ज्वाइंट सेक्रेटरी हेल्थ डॉ. राकेश कुमार की अगुवाई में टीम ने कोठीपुरा का दौरा किया था।
इस दौरान टीम ने प्रशासन द्वारा चिह्नित लगभग 200 एकड़ जमीन के अलावा साथ लगती पशुपालन विभाग के फार्म की जमीन को भी देखा। दिल्ली से अब टीम ने फार्म क्षेत्र की लगभग 25 एकड़ जमीन को भी मांगा है। सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय टीम ने भवन निर्माण के लिए 25 एकड़ की यह जमीन बेहतर बताई है। लिहाजा, जिला प्रशासन ने भी तमाम औपचारिकताएं पूरी करते हुए केंद्र को तमाम दस्तावेज भेज दिए हैं। उपायुक्त मानसी सहाय ठाकुर ने केंद्रीय टीम द्वारा और भूमि मांगने की पुष्टि की है।
भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू- एम्स निर्माण से पहले तमाम भूमि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नाम हस्तांतरित होगी। इसकी प्रक्रिया जिला प्रशासन ने आरंभ कर दी है। उपायुक्त मानसी सहाय ठाकुर ने बताया कि वन, पशुपालन विभाग और स्वास्थ्य विभाग के निदेशकों को इस बारे पत्राचार किया गया है। भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया भी आरंभ कर दी गई है।
मैप तैयार कर दिल्ली भेजा- जिला राजस्व अधिकारी डॉ. शशिपाल शर्मा ने बताया कि बिलासपुर में साइट विजिट करने आई टीम ने साइट का कंटूर मैप मांगा था जिसे लोनिवि के माध्यम से तैयार करवाया गया है। कंटूर मैप लोनिवि के ही आला अधिकारियों के माध्यम से केंद्र को भेज दिया गया है।