हिमाचल के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान एम्स के पहले चरण का निर्माण शुरू हो गया है। बिलासपुर के कोठीपुरा में 1229 बीघा जमीन पर एम्स का निर्माण होना है। इसकी चारदीवारी पर ही करीब 20.55 करोड़ रुपये खर्च होंगे। चारदीवारी के निर्माण को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ऑनलाइन टेंडर आमंत्रित किए हैं।
आठ महीने में यह कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्रालय की ओर से जारी टेंडर दस अप्रैल को खोला जाएगा। यह एक मई तक दोपहर तीन बजे तक खुला रहेगा।दोपहर साढ़े तीन बजे निविदाएं खोली जाएंगी। इसके लिए आवेदन करने वालों को 30.55 लाख रुपये बतौर सिक्योरिटी जमा करवाने होंगे। प्रदेश में बनने वाले सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान के लिए यह पहला कदम है।
तीन अक्तूबर, 2017 को रखा था नींव पत्थर
पीएम मोदी ने तीन अक्तूबर, 2017 को बिलासपुर दौरे के दौरान एम्स का नींव पत्थर रखा था। एम्स के निर्माण पर 1351 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसमें अलग-अलग विभाग के स्पेशलिस्ट डॉक्टर बैठेंगे। हर साल एमबीबीएस के साथ नर्सें भी प्रशिक्षण हासिल करेंगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा था कि एम्स का निर्माण 48 माह में पूरा हो जाएगा।
इसके बाद इसे लोगों को समर्पित कर दिया जाएगा। वहीं, जिला भाजपा सचिव एवं केंद्रीय मंत्री के मीडिया प्रभारी स्वदेश ठाकुर ने बताया कि टेंडर खोल दिए गए हैं। पहले चरण में चारदीवारी का कार्य अगले माह से शुरू होगा। आठ माह में इसे तैयार किया जाएगा। इसके बाद अगले चरण के टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। एम्स का निर्माण युद्ध स्तर पर शुरू हो चुका है।
कांग्रेस ने बनाई रूपरेखा, अमल में लाई मोदी सरकार
एम्स की रूपरेखा केंद्र में कांग्रेस कार्यकाल में 2013 के बजट में बनाई गई थी। योजना आयोग की प्लानिंग थी कि एक आईआईएम, आईआईटी, एम्स, केंद्रीय विश्वविद्यालय, एनआईएफ हर राज्य को दिया जाए। मई 2014 में केंद्र में सरकार बदली और पीएम बने। सिंतबर-अक्तूबर 2014 में जेपी नड्डा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बने। उन्होंने अक्तूबर 2014 को हिमाचल में एम्स खोलने की घोषणा की थी।