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सीवीओ संजीव को नड्डा के कहने पर हटाया गया!

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) रहे संजीव चतुर्वेदी को पद से हटाने में भाजपा के राज्यसभा सदस्य जेपी नड्डा का नाम सामने आ गया है।
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उन्हीं के पत्र पर स्वास्थ्य मंत्री ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया था। संजीव को सीवीओ पद से हटाने के लिए 24 घंटे के अंदर 20 अधिकारियों ने अपने हस्ताक्षर किए। इसमें सेक्शन ऑफिसर से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक के हस्ताक्षर हैं।

भाजपा के राज्यसभा सदस्य और महासचिव ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर संजीव चतुर्वेदी को पद से हटाने के अलावा एम्स के पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद पॉल को सीवीओ बनाने की सिफारिश की। चतुर्वेदी की ओर से लिए गए सभी फैसलों पर रोक लगाने की भी मांग की।
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हरियाणा भेजने को कहा

यही नहीं संजीव को उनके होम काडर (हरियाणा) भेजने का आग्रह भी किया गया। जबकि चतुर्वेदी को विशेष परिस्थितियों में राज्य के मुख्यमंत्री के न चाहते हुए भी डेपुटेशन पर केंद्र में लाया गया था।

क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयुक्त ने कहा था कि संजीव चतुर्वेदी ने हरियाणा में भ्रष्टाचार के कई मामलों का खुलासा किया है, लिहाजा उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इसके बावजूद जे.पी.नड्डा संजीव चतुर्वेदी को होम काडर भेजने के लिए दबाव बनाया।

संजीव को सीवीओ पद से हटाने के लिए वास्तविकता को भी दरकिनार किया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सीवीसी को बताया गया कि एम्स में सीवीओ का पद बनाने के लिए कहा गया है, लेकिन इस पर एम्स की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।
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चौधरी को बचाने की कोशिश!

स्वास्थ्य मंत्रालय ने नड्डा के पत्र पर कहा था कि सीवीओ के पद के लिए एम्स की गवर्निंग बॉडी और इंस्टीट्यूट बॉडी में अनुमति मिल चुकी है। अब वही मंत्रालय कह रहा है कि अभी सीवीओ का पद सृजित नहीं हुआ है।

नड्डा वर्ष-1998 से 2003 तक हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री थे। इस बीच वर्ष-2001 से 2003 तक विनीत चौधरी स्वास्थ्य सचिव थे। सूत्रों के मुताबिक इस कार्यकाल में स्वास्थ्य विभाग में कई घोटाले का आरोप लगा, जिसकी सीबीआई जांच की मांग विपक्षी पार्टियों ने की थी।

सूत्रों की माने तो यही वजह है कि नड्डा, विनीत चौधरी को बचाने के लिए संजीव चतुर्वेदी के फैसले को रद्द करवाना चाहते हैं।
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