इसमें ट्रामा आईसीयू, आपातकालीन वार्ड, बर्न यूनिट और अन्य विशेष उपचार सुविधाएं विकसित की जाएंगी। एम्स बिलासपुर की आपातकालीन ओपीडी में रोजाना 100 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि यहां केवल लगभग 30 मरीजों के लिए ही व्यवस्था है। ऐसे में आपातकालीन सेवाओं पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और एडवांस ट्राॅमा सेंटर की आवश्यकता पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है। प्रदेश के हमीरपुर और मंडी मेडिकल कॉलेजों से हर दिन करीब 30 से अधिक मरीज रेफर होकर सीधे एम्स बिलासपुर पहुंच रहे हैं। इसके अलावा टीएमसी से भी मरीज इलाज के लिए यहां भेजे जा रहे हैं। इनमें पेट दर्द, जहर खाने (प्वाइजनिंग), सांप काटने जैसी सामान्य शिकायत वाले मरीज भी शामिल हैं। नियमों के तहत जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में मरीजों का प्राथमिक उपचार किया जाना चाहिए और केवल गंभीर स्थिति में ही उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थान भेजा जाना चाहिए, लेकिन एम्स शुरू होने के बाद मेडिकल कॉलेजों से मरीजों का रेफरल आम हो गया है। इस कारण गंभीर मरीजों को आपातकालीन सेवाओं में समय पर उपचार मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बर्न यूनिट न होने से बढ़ती है समस्या, हेलीपैड की सुविधा भी होगी विकसित
अस्पताल में अलग से बर्न यूनिट न होने के कारण गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज में भी कठिनाई आती है। कई मामलों में मरीजों को अन्य संस्थानों में भेजना पड़ता है, जिससे समय और जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं। प्रस्तावित परियोजना में बर्न यूनिट शामिल होने से यह समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। परियोजना के तहत हेलीपैड की सुविधा भी विकसित करने की योजना है, ताकि, दुर्गम क्षेत्रों से गंभीर मरीजों को एयरलिफ्ट कर तेजी से अस्पताल पहुंचाया जा सके। इससे आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और मजबूती मिलेगी।