व्रत की तिथि कल दोपहर 12:24 से 14 अक्तूबर को सुबह 11:09 बजे तक रहेगी
शाम 5:53 से 7:08 बजे तक पूजन का मुहूर्त
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्तूबर को रखा जाएगा। इस दिन माता अहोई की पूजा की जाएगी। महिलाएं निर्जला व्रत रखकर संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करेंगी। शाम को तारों को देखकर व्रत खोलेंगी।
अहोई अष्टमी की तिथि सोमवार को दोपहर 12:24 बजे से 14 अक्तूबर को सुबह 11:09 बजे तक रहेगी। पूजन का मुहूर्त शाम 5:53 से 7:08 तक रहेगा। तारे देखने का समय शाम 6:17 बजे और चंद्रोदय का समय रात 11:20 बजे होगा। गंज बाजार के राधा-कृष्ण मंदिर के पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि अहोई अष्टमी व्रत करने से संतान को अच्छा स्वास्थ्य और लंबी आयु मिलती है। यह व्रत परिवार में सुख-शांति और समृद्धि को बढ़ावा देता है।
ये है अहोई अष्टमी पूजा की विधि
अहोई अष्टमी पर सुबह स्नान कर अहोई माता की पूजा का संकल्प लें। इसके बाद माता की आकृति गेरू या लाल रंग से दीवार पर बनाएं। सूर्यास्त के बाद तारे निकलने पर पूजन आरंभ करें। पूजा सामग्री में चांदी या सफेद धातु की अहोई, चांदी की मोती की बोर (मनका), जल से भरा कलश, दूध, भात, हलवा, फूल और दीपक शामिल करें। सबसे पहले अहोई माता की रोली, फूल और दीपक से पूजा करें। माता को दूध-भात अर्पित करें। हाथ में गेहूं के सात दाने और कुछ दक्षिणा लेकर अहोई माता की कथा सुनें। कथा के बाद चांदी की बोर (मनका) गले में पहन लें। गेहूं के दाने और बायना सास को देकर उनका आशीर्वाद लें तथा रात में तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।