नगदी फसलों में विभिन्न किस्मों की सब्जियों और आलू की खेती से काठू की खेती सिकुड़ गई। शोधकर्ताओं का कहना है कि काठू की सब्जी में प्रोटीन और कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। मार्केट में इसके बिस्कुट, नूडल्स, आटा और कई अन्य उत्पाद भी हैं। लाहौल निवासी छेरिंग फुंचोग (83) ने बताया कि कई वर्ष पूर्व लाहौल का हर परिवार काठू की खेती करता था। आज यह खेती विलुप्त होने की कगार पर है। आईएचबीटी पालमपुर की वैज्ञानिक डाॅ. वंदना जायसपाल ने बताया कि वह पिछले तीन साल से लाहौल में काठू की फसल पर शोध कर रही हैं।
सीएसआईआर-आईएचबीटी पालमपुर के निदेशक डाॅ. सुदेश कुमार यादव ने बताया कि लाहौल में काठू फसल के 300 किस्म के बीज लगाए गए हैं। जिस बीज के सार्थक परिणाम सामने आएंगे, उसको तरजीह देकर काठू की फसल बड़े स्तर पर तैयार होगी। काठू एक अनाज है, जिसे स्थानीय भाषा में ब्राफो और फुलाई भी कहा जाता है। इसके आटे से रोटी और अन्य पकवान बनाए जाते हैं। इसका स्थानीय व्यंजन चिलड़ा काफी प्रसिद्ध है। विशेषज्ञों के अनुसार इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है।