आईजीएमसी में जानवरों के काटने 159 मामले आए, शहर में नवंबर माह में कुत्तों और बंदरों ने 123 को लहुलूहान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में नवंबर माह के दौरान पशुओं और जंगली जानवरों के काटने के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई।
अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार पूरे महीने में 159 मरीज जानवरों के काटने के बाद उपचार के लिए आए। इसमें अकेले कुत्तों और बंदरों के काटने के 123 मामले हैं। आंकड़ों के मुताबिक
कुत्तों के 94, बंदरों के 29, बिल्लियों के 33 और अन्य पशुओं के 3 मामले शामिल हैं। नवंबर में पहली बार खरगोश के काटने का एक मामला आईजीएसमी में आया है। आमतौर पर अस्पताल में कुत्तों, बंदरों और बिल्लियों के काटने के मरीज अधिक आते हैं लेकिन खरगोश का मामला बेहद दुर्लभ है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम रहता है फिर भी मरीज को रैबीज संबंधी एहतियात और प्राथमिक उपचार देना आवश्यक होता है।
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक नवंबर माह के दौरान पहुंचे अधिकांश मरीज शहर के आवासीय और भीड़भाड़ वाले इलाकों से थे जहां लावारिस कुत्तों और बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि सर्दियों की शुरुआत में भोजन की तलाश में जानवर अक्सर घरों तथा बाजारों के आसपास पहुंच जाते हैं जिससे ऐसे मामलों में इजाफा होता है। अस्पताल प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार का पशु काटने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें और पूरी एंटी-रेबीज वैक्सीन समय पर लगवाएं।