अनुसूचित जाति और जनजाति से संबंधित मामलों की पुलिस सही ढंग से छानबीन करे। इसके बाद ही कानून की उचित धाराएं लगाई जाएं। अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत गठित जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त आदित्य नेगी ये आदेश दिए। उन्होंने जिला न्यायवादी को निर्देश दिए कि गत तीन वर्षों से न्यायालयों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत लंबित 31 मामलों की शीघ्र सुनवाई की जाए। पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों की सही रूप से छानबीन कर कानून की उचित धाराएं लगाई जाएं। कहा कि कुछ मामलों में वर्णमालानुसार कानून की धाराएं न लगने से संबंधित पीड़ित व्यक्ति को राहत राशि नहीं मिली है।
एडीसी ने जानकारी दी कि वर्ष 2015 से सितंबर 2018 तक इस अधिनियम के तहत 60 मामले दर्ज हुए। इनमें 31 मामले कोर्ट में लंबित हैं। 14 मामले सबूत के अभाव में खारिज हुए। दो मामलों में आरोपी कोर्ट से बरी हुए। चार मामलों में सबूत के अभाव में पुलिस ने एससी, एसटी धारा हटाई है। आठ मामले पुलिस के पास जांच के लिए लंबित हैं। तीन वर्षों में इस अधिनियम के 38 पीड़ित व्यक्तियों को साढ़े 28 लाख की राशि राहत के रूप में दी गई है। कहा कि बकरास पंचायत में केदार सिंह जिंदान के परिजनों को 4,12,500 रुपये राहत के रूप में दिए गए। उन्होंने कहा कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे। जिला कल्याण अधिकारी विवेक अरोड़ा ने इस अधिनियम से संबधित दर्ज मामलों की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी।