मिड डे मील वर्करों ने सोमवार को बारिश के बीच जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन किया। भारी बारिश की चेतावनी के चलते सरकारी स्कूलों में सोमवार की छुट्टी घोषित होने से स्कूलों में हड़ताल का खासा असर नहीं हुआ।
मिड डे मील वर्कर यूनियन ने जिला मुख्यालयों में केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर जिला उपायुक्तों के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे। सीटू से संबद्ध यूनियन की अध्यक्ष कांता महंत ने बताया कि बीते नौ साल से मानदेय में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है।
साल 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मानदेय में एक हजार रुपये की बढ़ोतरी करने का लिखित आश्वासन दिया था। लेकिन अभी तक यह बढ़ोतरी नहीं हुई है। इस मांग को लेकर यूनियन दिल्ली में कई बार प्रदर्शन कर चुकी है लेकिन केंद्र सरकार सुध नहीं ले रही।
महंगाई के इस दौर में एक हजार रुपये के मानदेय में गुजारा करना मुश्किल हो गया है। हाल ही में केंद्र सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाओं और आशा वर्करों के मानदेय में बढ़ोतरी की लेकिन मिड डे मील वर्करों के साथ सौतेला व्यवहार किया है।
महंत ने केंद्र सरकार से मिड डे मील वर्करों के मानदेय में पांच हजार रुपये की बढ़ोतरी करने, 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के मुताबिक उन्हें पक्का करने, ग्रेच्युटी तथा पेंशन सुविधा देने और नौकरी से संबंधित 25 बच्चों की शर्त को हटाने की मांग की।