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लॉकडाउन में फीस मांगी तो निजी स्कूल पर होगी कार्रवाई, शिक्षा निदेशालय की आखिरी चेतावनी

Sat, 25 Apr 2020 06:48 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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सांकेतिक तस्वीर
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हिमाचल में कोरोना वायरस से बचाव के लिए प्रदेश में लॉकडाउन के दौरान फीस मांगने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ महामारी रोग और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। फीस वसूली की लगातार मिल रही शिकायतों पर उच्च शिक्षा निदेशालय ने निजी स्कूलों को आखिरी चेतावनी जारी कर दी है। शनिवार को जारी पत्र में उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि आगामी आदेशों तक प्रदेश में अभिभावकों से फीस वसूली पर रोक लगाई गई है। ऐसे में निजी स्कूल प्रबंधन सरकार को कड़ी कार्रवाई के लिए बाध्य न करे। रोक के बावजूद फीस वसूली के मैसेज भेजने वाले स्कूल निजी शिक्षण संस्थान नियामक एक्ट 1997 का उल्लंघन न करें।

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प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों पर शिकंजा कसते हुए बीते दिनों आगामी आदेशों तक फीस वसूली पर पूर्ण रोक लगाई है। निदेशालय ने निजी स्कूलों को पत्र जारी कर देश और प्रदेश में हालात सामान्य न होने तक फीस वसूली पर रोक लगाई है। इसके बावजूद कुछ निजी स्कूल अभिभावकों को एसएमएस भेजकर फीस जमा करवाने को कह रहे हैं। सोशल मीडिया सहित फोन के माध्यम से कई अभिभावकों ने निजी स्कूलों की इस कार्य प्रणाली की शिक्षा मंत्री से शिकायत की है। जिस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए निदेशालय ने शनिवार को पत्र जारी कर आगामी आदेशों तक फीस न वसूलने के आदेश जारी करते हुए निजी स्कूलों को अंतिम चेतावनी भी दी है। 

माफ की जाए निजी स्कूलों की मार्च से मई तक की फीस

वहीं, छात्र-अभिभावक मंच ने निजी स्कूलों की मार्च से मई तक फीस माफ करने की मांग की है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को भेजे पत्र में मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने इस वैश्विक महामारी के दौरान अभिभावकों को आर्थिक संकट से बचाने के लिए सरकार से गुहार लगाई है। कहा कि प्रदेश की जनता का एक बड़ा हिस्सा निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 5 लाख 13 हजार छात्र और उनके लगभग 8 लाख अभिभावक हैं। इस संकट की घड़ी में अन्य तबकों की तरह ये भी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। मंच ने इस संकट की घड़ी में सरकार से फीस बढ़ोतरी और मार्च से मई की फीस माफी के विषय पर तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। लॉकडाउन और कर्फ्यू के चलते यह फीस बढ़ोतरी वापस लेना और मार्च से मई की फीस माफ करना बेहद अनिवार्य हो गया है।

पांच लाख से ज्यादा अभिभावकों में से लगभग सत्तर प्रतिशत अभिभावक मजदूर, आउटसोर्स कर्मचारी, छोटे दुकानदार, टैक्सी संचालक, कारोबारी, होटल संचालक के रूप में कार्यरत हैं। इनकी आय के साधन कर्फ्यू से तबाह हो गए हैं। विजेंद्र मेहरा ने कहा कि निजी स्कूलों की मुनाफाखोरी और संवेदनहीनता की हद यह है कि ऐसे संकट काल में भी कई निजी स्कूलों ने फीसों को ऑनलाइन जमा करने के फरमान जारी कर दिए हैं। हाल ही में शिमला के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल ने फीसों को ऑनलाइन जमा करने के संदेश अभिभावकों को भेजे हैं। इस स्कूल ने आठ प्रतिशत फीस बढ़ोतरी मार्च के महीने में पहले ही कर दी थी, इसके अनुसार मार्च से मई की पहली तिमाही में लगभग 19 हजार की राशि जमा करने का अभिभावकों को संदेश कुछ दिन पहले ही भेजा गया था। 24 अप्रैल को इस 19 हजार की राशि को बढ़ाकर लगभग 26 हजार रुपये जमा करने का संदेश अभिभावकों को भेज दिया गया। पहले से की गई 8 प्रतिशत की फीस बढ़ोतरी के अलावा 15 प्रतिशत की इस फीस बढ़ोतरी ने अभिभावकों के होश उड़ा दिए हैं। 
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अगले हफ्ते से रेडियो पर शुरू हो सकती है पढ़ाई

प्रदेश में अगले सप्ताह से रेडियो के माध्यम से भी नौवीं से जमा दो कक्षा के विद्यार्थियों की पढ़ाई शुरू हो सकती है। आकाशवाणी ने शिक्षा विभाग को चार से पांच घंटे तक का स्लॉट देने को हामी भर दी है। अब सरकार के आदेशानुसार विभागीय अधिकारी रेडियो पर पढ़ाई करवाने के लिए कंटेंट तैयार करने में जुट गए हैं।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि आकाशवाणी के साथ एक घंटे का स्लॉट पढ़ाई के लिए देने का बीते दिनों एमओयू हो चुका है। अब आकाशवाणी चार से पांच घंटे तक समय भी 50 फीसदी रेट पर देने को तैयार है। ऐसे में इस मामले को लेकर विभागीय स्तर पर चर्चा जारी है। जल्द ही इस पर फैसला लेकर रेडियो से भी बच्चों की पढ़ाई शुरू करवाई जाएगी।
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