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पंचायत चुनावों में फंसा नया पेच, रद्द हो सकते हैं रोस्टर

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हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में नया पेच फंस गया है। हाईकोर्ट के आदेश पर सूबे में पंचायतों के पुनर्सीमांकन पर रोक लग गई है। जिन पंचायतों का पुनर्सीमांकन हो चुका है, उसे भी रद्द करने की नौबत आ गई है।
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हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा है कि पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के 120 दिन से पहले ही उनकी सीमाओं में बदलाव किया जा सकता है। इसके बाद पुनर्सीमांकन को लेकर जारी तमाम अधिसूचनाओं पर अमल न किया जाए।

ऐसे में अब पंचायतों के पुराने स्वरूप पर ही आरक्षण रोस्टर तय किया जा सकता है। इससे नगर निकायों के पुनर्सीमांकन की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी। प्रदेश की ज्यादातर पंचायतों का कार्यकाल 22 जनवरी 2016 को पूरा हो रहा है। ऐसे में 25 सितंबर के बाद जारी पंचायतों के पुनर्सीमांकन की तमाम अधिसूचनाएं रद्द होंगी।
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अब सरकार के पास है ये विकल्प

गौर है कि ज्यादातर पंचायतों के पुनर्सीमांकन की अधिसूचनाएं 25 सितंबर के बाद ही जारी हुई हैं। पंचायतों के पुनर्सीमांकन से संबंधित आठ याचिकाओं पर महाधिवक्ता ने राज्य सूचना आयोग की ओर से नौ अक्तूबर 2015 को जारी अधिसूचना की एक प्रति अदालत के समक्ष रखी। इस पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायमूर्ति त्रिलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने हाल ही में फैसला सुनाया है।

वहीं, हिमाचल सरकार के पास अब प्रदेश हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने या सुप्रीम कोर्ट जाने के दोनों ही विकल्प हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट के मौजूदा आदेशों पर गौर कर सरकार पंचायतों के ढांचों में बदलाव न कर इनकी पुरानी सीमाओं में ही चुनाव करवा सकती है। यह मालूम रहे कि कई पंचायतें दो से तीन विधानसभा क्षेत्रों में बंटी हुई हैं।

देरी से आवेदन लेने का खामियाजा भुगता सरकार ने

राज्य सरकार ने यूं तो पंचायतों के पुनर्सीमांकन की इस प्रक्रिया को छह माह पूर्व शुरू कर लिया था। पर इसमें लेटलतीफी करना सरकार को महंगा पड़ा। विभाग ने ग्रामसभाओं से आवेदन काफी समय पहले मांगने शुरू कर दिए थे, पर इनके पुनर्सीमांकन की प्रक्रिया को देरी से शुरू किया गया।

कई पंचायतों के लिए 25 सितंबर से बाद भी उपायुक्तों और मंडलायुक्तों के पास अपीलें होती रहीं। ऐसे में इनका पुनर्सीमांकन भी नए आदेशों के तहत होता रहा। यह 120 दिनों की वर्जित अवधि के भीतर ही किया जाता रहा।

पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा का कहना है कि सरकार इस मामले में लीगल ओपिनियन ले रही है। अधिकतर पंचायतों का टेन्योर 22 जनवरी 2016 को पूरा हो रहा है। 25 सितंबर 2015 से 120 दिन की अवधि के भीतर पंचायतों के पुनर्सीमांकन की जो भी अधिसूचनाएं जारी की गई हैं, उन्हें लागू नहीं किया जा सकेगा। सरकार के पास पुनर्विचार याचिका का ऑप्शन है। पर इस पर विचार कर रहे हैं कि क्या करना है।

क्या पड़ेगा असर
1. और उलझ गया आरक्षण रोस्टर, अब तीसरी बार बनेगा
2. नए पेच से और लेट हो सकते हैं दूसरे चरण के पंचायत चुनाव
3. धर्मशाला नगर निगम में सात पंचायतें शामिल करने पर भी असमंजस

अब नए सिरे से तय होगा आरक्षण रोस्टर

प्रदेश में पंचायत चुनाव का आरक्षण रोस्टर उलझ गया है। अब इसे विवादित ग्राम पंचायतों और जिला परिषद वार्डों में तीसरी बार नए सिरे से तैयार करना पड़ेगा। आरक्षण का फार्मूला पेचीदा होने के कारण इससे कुछ संबंधित जिलों में आरक्षण की सारी स्थिति फिर बदल सकती है। लोगों को अभी ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों में आरक्षण की स्थिति जानने के लिए और इंतजार करना होगा।

नए पेच के कारण अब पंचायतों के दूसरे चरण के चुनाव और देरी से हो सकते हैं। पंचायतों में आरक्षण रोस्टर जारी ही नहीं हो पा रहा है। सबकी टकटकी इसी पर लगी हुई है। शुरू में आरक्षण रोस्टर को सॉफ्टवेयर से तैयार किया गया। बाद में सॉफ्टवेयर पर कुछ मंत्रियों की ओर से उंगली उठाए जाने के बाद इससे तय आरक्षण को मंत्रिमंडल ने खारिज कर दिया।

फिर बिना सॉफ्टवेयर के मैनुअली आरक्षण तय करने के आदेश जारी किए गए। अब बिना सॉफ्टवेयर के आरक्षण रोस्टर लगभग सभी जिलों में फाइनल माना जा रहा था। कुछ जिलों ने तो जारी करना भी शुरू कर दिया था। इसे पुनर्सीमांकन के दौर से गुजर रहीं पंचायतों में नए जोड़े जा रहे क्षेत्रों की जनसंख्या लेकर तैयार किया जा रहा था, मगर अब इसका भी कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

सचिवालय में दिन भर चला बैठकों का दौर

25 सितंबर के बाद के पुनर्सीमांकन के आदेशों के खारिज हो जाने के बाद अब पंचायतों का आरक्षण फिर से पंचायतों की पुरानी सीमाओं में ही तय हो सकता है। हालांकि, अभी पंचायतीराज विभाग को सरकार के आगामी आदेश का इंतजार है। पंचायतीराज मंत्री अनिल शर्मा की मानें तो राज्य सरकार ये चुनाव तय अवधि में ही करवाने के प्रयास में है। आरक्षण रोस्टर भी जल्द जारी किया जाएगा। कहा कि तीन-चार दिन में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

प्रदेश सचिवालय में पूरे दिन बैठकों के दौर चलते रहे। पंचायतीराज विभाग में हड़कंप मचा रहा। सोमवार को राज्य सचिवालय में दोपहर के समय एक ही मंत्री अनिल शर्मा बैठे रहे। पंचायतीराज मंत्री अनिल शर्मा के कार्यालय में अधिकारियों की खूब दौड़-भाग लगी रही। शर्मा ने पहले पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों की बैठक ली। साथ ही शहरी विकास विभाग के अधिकारियों से भी चर्चा की। चर्चा का यह दौर काफी लंबा चलता रहा। राज्य निर्वाचन आयुक्त टीजी नेगी भी पंचायतीराज मंत्री से मिले। इसके बाद सचिव पंचायतीराज ओंकार शर्मा ने भी राज्य निर्वाचन आयुक्त टीजी नेगी से मिलकर उनसे लंबी मंत्रणा की।

पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा से तीखे सवाल

सवाल : क्या ये सही नहीं है कि आपमें और अन्य मंत्रियों में आपसी तालमेल नहीं होने के कारण ही पंचायत चुनाव में लगातार विवाद खड़े हो रहे हैं? रोस्टर सॉफ्टवेयर मामले में ये बात सामने आ चुकी है।
जवाब : नहीं ऐसा नहीं है। तालमेल की कोई कमी नहीं है। मैं पारदर्शिता में विश्वास करता हूं, इसीलिए शुरू में आरक्षण सॉफ्टवेयर इंट्रोड्यूस किया। खैर, वह रद्द हो गया। अब भी तो एक्सेल शीट पर ही आरक्षण रोस्टर तय हो रहा है। यह कंप्यूटर पर होती है। यह भी सॉफ्टवेयर की तरह ही है। इसमें कोई छेड़खानी नहीं की जा सकती। मैनुअली का मतलब यही है। पिछली बार भी ऐसे ही रोस्टर तय हुआ।

सवाल : पुनर्सीमांकन के काम को देरी से शुरू किया गया, क्या इसीलिए ये सब हो रहा है? इसमें पंचायतीराज विभाग की भी तो गलती है।
जवाब : हमने बहुत पहले आवेदन मांगने शुरू कर दिए थे। कई विधायकों, पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से ही देरी की जाती रही। उनकी ओर से मामले लगातार आते ही रहे, इसलिए यह मामला लेट होता गया।
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इन सवालों का दिया ये जवाब

सवाल : कहा जा रहा है कि मैनुअली सॉफ्टवेयर इसलिए तैयार किया गया है, ताकि इसमें गड़बड़ी की गुंजाइश रहे।
जवाब : ऐसा कहना गलत है। भाजपा इस बारे में दुष्प्रचार कर रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों को साफ कह दिया गया है कि वे अगर कोई गड़बड़ी करेंगे तो इसे झेलने के लिए भी तैयार रहें। उन पर कार्रवाई होगी। वैसे जब अभी भी कंप्यूटर पर ही एक्सेल शीट पर सब हो रहा है तो इसमें ऐसी कोई गुंजाइश ही नहीं है। यह जमा-गुणा खुद करती है। दशमलव के बाद के तीन अंकों तक गणना हो रही है। 2011 की जनसंख्या आधार है।

सवाल: कांग्रेस सरकार अपनी विचारधारा के लोगों को पंचायतों में लाना चाहती है। उपायुक्तों से लेकर तमाम अधिकारियों का राजनेताओं का बहुत प्रेशर है। क्या ये सही है?
जवाब : यह आरोप भी भाजपा लगा रही है। अधिकारियों पर किसी तरह का दबाव नहीं है। उन्हें नियमानुसार चुनावी प्रक्रिया अपनाने को कहा गया है।

सवाल : ये क्या बात हुई कि सरकार ने ट्राइबल एरिया में आरक्षण रोस्टर बाद में जारी किया और चुनाव आयोग ने अधिसूचना पहले जारी की। क्या दूसरे चरण में भी ऐसा किया जा रहा है?
जवाब : नहीं, ऐसा कुछ नहीं होगा। इस बार कोशिश रहेगी कि जल्दी आरक्षण रोस्टर जारी हो। आप देखते जाइये, प्रयास रहेगा कि इसे अधिसूचना से पहले जारी कर दिया जाए।
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