नौणी विवि में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय
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उन्होंने कहा कि जैविक खेती से फसल में गुणवत्ता आएगी व उत्पादन बढ़ेगा। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हिमाचल में 70 प्रतिशत किसान हैं। यहां जीडीपी में 23 प्रतिशत कृषि का योगदान है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना फसल की गुणवत्ता को बढ़ाने की जरूरत है।
जिसके लिए मिट्टी व सिंचाई योजनाओं में सुधार करना होगा। इस मौके पर नौणी विवि के कुलपति डॉ. परविंद्र कौशल ने कहा कि 2030 तक आबादी के हिसाब से कुल 350 मीट्रिक टन आनाज की आवश्यकता रहेगी।
इसके लिए उत्पादन की मौजूदा स्थिति को कायम रखना होगा और इसे आगे बढ़ाने के प्रयास करने होंगे। तीन दिन तक चलने वाले इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में देश भर से करीब 550 कृषि वैज्ञानिक, प्रवक्ता, शोधकर्ता व प्रशिक्षु हिस्सा ले रहे हैं।