कांग्रेस टिकट पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगूराम मुसाफिर के नाम का सबसे आगे चल रहा था। ब्लॉक कांग्रेस से भी मुसाफिर के नाम की सहमति बनी थी। ऐन वक्त पर दो अन्य दावेदारों ने टिकट को आवेदन कर दिया। एक दावेदार सराहां तो दूसरा राजगढ़ क्षेत्र से संबंध रखता है। भाजपा में भी पहले दयाल प्यारी प्रबल दावेदार मानी जा रही थीं।
वह एक बार जिला परिषद अध्यक्ष और दो बार सदस्य रही हैं। पैनल में उनका नाम शामिल न होने से भाजपा की डगर भी कठिन हो चली है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि पच्छाद के भाजपा नेताओं से चल रही तकरार ने दयाल प्यारी को पैनल से बाहर का रास्ता दिखाया।
राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि दयाल प्यारी पर उनके समर्थनों का भारी दबाव है। हालांकि, वह अभी भी टिकट की दौड़ में शामिल बताई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि वह दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी से संपर्क में हैं। कांग्रेस के लिए भी चुनौतियां कम नहीं हैं। देखना यह है कि टिकट फाइनल होने के बाद दूसरे दावेदारों को दोनों दल मनाने में कामयाब होते हैं या फिर पच्छाद की राजनीति में टिकट के चाहवान भूचाल लाएंगे।