शिमला। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह आखिर तक शिमला शहर से हरीश जनारथा के लिए लड़ते रहे लेकिन पहाड़ी फैक्टर जनारथा पर भारी पड़ गया और उनकी टिकट काट दी गई। आनंद शर्मा और सुक्खू हाईकमान से शिमला शहर के लिए माइनस पहाड़ी प्रत्याशी की पैरवी करते रहे।
उन्होंने तर्क दिया कि शिमला से सीपीआईएम के प्रत्याशी संजय चौहान और भाजपा प्रत्याशी सुरेश भारद्वाज दोनों ही पहाड़ी हैं। अगर कांग्रेस भी पहाड़ी प्रत्याशी को ही चुनावी मैदान में उतारती है तो हार का मुंह देखना पड़ सकता हैं। क्योंकि शिमला शहर में केवल पांच हजार पहाड़ी वोट हैं। यह इन तीन में बंट जाएंगे। आनंद शर्मा कैंप ने हाईकमान के सामने नगर निगम में हुई कांग्रेस की हार का ठीकरा भी हरीश जनारथा के सिर पर ही फोड़ा। हालांकि नगर निगम चुनाव के दौरान कांग्रेस ने पहले सभी कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने की छूट दी और ऐन मौके पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी थी, जिसमें कई वार्डों में कांग्रेस के ही कई कार्यकर्ता एक दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए थे।
बुधवार सुबह हुई बैठक में शिमला सीट पर हरीश जनारथा और हरभजन सिंह भज्जी को लेकर काफी गहमागहमी हुई। आनंद शर्मा व सुक्खू खेमा हरभजन सिंह भज्जी पर अड़े रहे और नाम पर अंतिम मुहर लगवा दी। वीरभद्र सिंह बैठक खत्म होने के बाद बाहर निकले। तब तक यह खबर फैल चुकी थी कि जनारथा का टिकट कट चुका है। इसी दौरान ठियोग विधानसभा क्षेत्र से वीरभद्र सिंह की जगह किसी दूसरे प्रत्याशी को उतारने की खबर पर भी मुहर लग गई। इससे साफ हो गया कि जिला शिमला की दो सीटों पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को सीधे समझौता करना पड़ा। वीरभद्र अर्की जाने के लिए बेहिचक तैयार हो गए, लेकिन उनके मन में कहीं न कहीं जनारथा को टिकट न दिला पाने की टीस थी। लिहाजा उन्होंने देर शाम फिर से राहुल गांधी से मिलने की ठानी और जनारथा को लेकर उनके पास पहुंच गए। सीएम ने राहुल गांधी से विन्रम आग्रह किया कि शिमला सीट पर पुनर्विचार किया जाए और टिकट जनारथा को दी जाए। लेकिन वहां एक बार फिर आनंद खेमा वीरभद्र पर भारी पड़ गया। काफी विचार- विमर्श के बाद राहुल गांधी ने टिकट बदलने से इंकार कर दिया।