हिमाचल के करीब आठ हजार होमगार्डों को सुप्रीम कोर्ट ने झटका दिया है। होमगार्डों की याचिकाओं को खारिज करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि होमगार्ड्स एक वॉलंटियर संगठन है। इनकी सेवाएं इमरजेंसी में ली जाती हैं। इन्हें रेगुलर करने का एक्ट में ही कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने होमगार्डों को कुछ राहत देते कहा है कि इन्हें सेवाओं के दौरान पुलिस के बराबर दैनिक भत्ते दिए जाने चाहिए।
न्यायालय ने हिमाचल, पंजाब तथा दिल्ली सरकार को तीन माह के भीतर इस बारे में पॉलिसी बनाने के आदेश दिए। होमगार्डों की ओर से केस की पैरवी कर रहे अधिवक्ता विनोद शर्मा ने इसकी पुष्टि की है। नियमितीकरण के लिए हिमाचल, पंजाब तथा दिल्ली के होमगार्डों ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। बुधवार को इन याचिकाओं का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल हाईकोर्ट और पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।