सरकारी महकमों की लापरवाही से शिमला शहर के लिए पार्किंग प्लान बनाने की योजना लटक गई है। प्लान न बनने से शहर में रोज जाम लग रहा है। आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। पार्किंग प्लान बनाने को लेकर शुक्रवार को शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव प्रबोध सक्सेना की अध्यक्षता में बैठक तो हुई लेकिन सरकारी महकमों से रिपोर्ट न आने के कारण कोई फैसला नहीं लिया जा सका। अब प्रधान सचिव ने सभी विभागों को सख्त हिदायत देते हुए 10 अप्रैल तक अपनी पार्किंग की जानकारी देने को कहा है।
प्रदेश हाईकोर्ट ने पिछले साल शहरवासियों को ट्रैफिक जाम से राहत देने के लिए दो माह के भीतर प्लान बनाने के आदेश दिए थे। इस बारे में नवंबर में कई बैठकें भी हुई। 16 नवंबर को सभी विभागों को पत्र जारी किए गए कि वे अपने अधीन आने वाली पार्किंग की जानकारी नगर निगम को दें। लेकिन 15 फरवरी तक सिर्फ आईजीएमसी ने ही इस पत्र का जवाब दिया। यहां 207 वाहनों की पार्किंग है। निगम के अनुसार अभी लोनिवि, सीपीडब्ल्यूडी, रेलवे, पर्यटन, एनएचएआई, स्वास्थ्य समेत कई विभागों ने पार्किंग की जानकारी तक नहीं दी है।
शहरवासी भुगत रहे खामियाजा
शहर के लिए पार्किंग प्लान न बनने का खामियाजा शहरवासी भुगत रहे हैं। रोज सुबह शहर जाम हो रहा है। शुक्रवार को भी कार्टरोड और सर्कुलर रोड पर लंबा जाम लगा रहा। वहीं वार्डों में भी हालत खराब है। येलो लाइन न लगने से हर कहीं गाड़ियां पार्क हो रही हैं। यदि सभी सरकारी महकमे कोर्ट के आदेशों को सख्ती से मान लेते तो अब तक प्लान लागू हो गया होता।
एंबुलेंस रोड पर अब भी पार्क हो रही गाड़ियां
शहर के तकरीबन सभी एंबुलेंस रोड पर अब भी गाड़ियां अवैध रूप से पार्क हो रही हैं। कुछ माह पहले उपायुक्त ने शहर की 230 से ज्यादा सड़कों पर अवैध पार्किंग के चालान काटने के आदेश दिए थे। लेकिन पुलिस अब तक इसे लागू नहीं करवा पाई है।