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अंबुजा सीमेंट कारखाने से सटे गांव में 60 फीसदी लोगों को सांस की बीमारी

Sat, 21 Jul 2018 01:31 PM IST
विवेक मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हिमाचल प्रदेश में मौजूद गुजरात अंबुजा सीमेंट लिमिटेड की सीमेंट इंडस्ट्री के संबंध में स्पष्ट रिपोर्ट के लिए दोबारा टीम गठित कर चार हफ्तों में स्वास्थ्य जांच और प्रदूषण संबंधी रिपोर्ट तलब की है। दरअसल सोलन जिले में दाड़लाघाट के राउरी गांव में आबादी से कुछ दूरी पर मौजूद सीमेंट इंडस्ट्री से गांव की 60 फीसदी आबादी श्वास संबंधी बीमारी से ग्रसित है, जिससे बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं।

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इस बात की पुष्टि शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज कर चुका है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 28 जून, 2017 को एनजीटी में डॉक्टरों की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट से साफ संकेत मिलता है कि सीमेंट फैक्ट्री के जरिए ध्वनि और वायु प्रदूषण फैलाया जा रहा है।

इससे ग्रामीणों की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। हालांकि इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव आदि को वर्गीकृत नहीं किया गया है, इसलिए दोबारा स्वास्थ्य जांच के लिए समिति गठित की जा रही है।

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चार हफ्तों में देनी होगी रिपोर्ट

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल
इस जांच समिति में हिमाचल प्रदेश स्टेट लीगल सर्विस प्राधिकरण के सदस्य सचिव या उनके जरिए नामित सदस्य, पीजीआई चंडीगढ़ के निदेशक द्वारा नामित डॉक्टर, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला के जरिए नामित डॉक्टर, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय का निदेशक स्तरीय प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं।

जांच समिति को अपनी रिपोर्ट 31 अक्तूबर से पहले एनजीटी में दाखिल करनी है। इस समिति को खर्चा हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और इंडस्ट्री के जरिए दिया जाएगा। इस जांच समिति के नोडल ऑफिसर हिमाचल प्रदेश स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सदस्य सचिव होंगे।
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एक महीने में करना होगा अनुपालन

पीठ ने कहा कि समिति के जरिए दिए जाने वाली सिफारिशों पर एक महीने के भीतर अमल करना होगा। इसके बाद अनुपालन की रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में दाखिल करनी होगी।राउरी गांव के लोगों ने शिकायत की थी कि सीमेंट फैक्ट्री में होने वाली आवाज और ट्रकों की आवाजाही व हॉर्न की तेज आवाज ने उनका जीना दुश्वार कर दिया है। पूरा गांव शिमला उच्च न्यायालय के पूर्व आदेश के आधार पर पुनर्वास योजना के तहत दूसरी जगह पर जमीन और घर की सुविधा चाहता है।

स्वास्थ्य जांच के लिए उम्र के आधार पर चार ग्रुप बांटे गए थे। पूरी आबादी में कुल 60 फीसदी लोगों में श्वसन संबंधी बीमारी, 4 फीसदी त्वचा संबंधी बीमारी और 6 फीसदी ईएनटी संबंधी बीमारी पाई गई। बच्चों में त्वचा और श्वसन संबंधी बीमारी सबसे ज्यादा पाई गई। वहीं ईएनटी और असंतुलित बुखार (जिसका कारण न पता हो) जैसी बीमारी बच्चों और युवाओं में सबसे ज्यादा पाई गई।

- 0-14 वर्ष की उम्र वाले बच्चों में पोषण संबंधी कमियां, श्वसन संक्रमण
- 15-29 तक की उम्र वालों में पेट और गैस संबंधी विकार, तंत्रिका तंत्र में बीमारी और पोषण संबंधी कमियां  
- 30-44 वर्ष उम्र वालों में मांसपेशियों, हड्डियों और गैस विकार में परेशानी        
- 45-59 व 60 से अधिक वर्ष उम्र वालों में दिल की बीमारी सबसे ज्यादा
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