इस जांच समिति में हिमाचल प्रदेश स्टेट लीगल सर्विस प्राधिकरण के सदस्य सचिव या उनके जरिए नामित सदस्य, पीजीआई चंडीगढ़ के निदेशक द्वारा नामित डॉक्टर, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला के जरिए नामित डॉक्टर, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय का निदेशक स्तरीय प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं।
जांच समिति को अपनी रिपोर्ट 31 अक्तूबर से पहले एनजीटी में दाखिल करनी है। इस समिति को खर्चा हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और इंडस्ट्री के जरिए दिया जाएगा। इस जांच समिति के नोडल ऑफिसर हिमाचल प्रदेश स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सदस्य सचिव होंगे।
पीठ ने कहा कि समिति के जरिए दिए जाने वाली सिफारिशों पर एक महीने के भीतर अमल करना होगा। इसके बाद अनुपालन की रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में दाखिल करनी होगी।राउरी गांव के लोगों ने शिकायत की थी कि सीमेंट फैक्ट्री में होने वाली आवाज और ट्रकों की आवाजाही व हॉर्न की तेज आवाज ने उनका जीना दुश्वार कर दिया है। पूरा गांव शिमला उच्च न्यायालय के पूर्व आदेश के आधार पर पुनर्वास योजना के तहत दूसरी जगह पर जमीन और घर की सुविधा चाहता है।
स्वास्थ्य जांच के लिए उम्र के आधार पर चार ग्रुप बांटे गए थे। पूरी आबादी में कुल 60 फीसदी लोगों में श्वसन संबंधी बीमारी, 4 फीसदी त्वचा संबंधी बीमारी और 6 फीसदी ईएनटी संबंधी बीमारी पाई गई। बच्चों में त्वचा और श्वसन संबंधी बीमारी सबसे ज्यादा पाई गई। वहीं ईएनटी और असंतुलित बुखार (जिसका कारण न पता हो) जैसी बीमारी बच्चों और युवाओं में सबसे ज्यादा पाई गई।
- 0-14 वर्ष की उम्र वाले बच्चों में पोषण संबंधी कमियां, श्वसन संक्रमण
- 15-29 तक की उम्र वालों में पेट और गैस संबंधी विकार, तंत्रिका तंत्र में बीमारी और पोषण संबंधी कमियां
- 30-44 वर्ष उम्र वालों में मांसपेशियों, हड्डियों और गैस विकार में परेशानी
- 45-59 व 60 से अधिक वर्ष उम्र वालों में दिल की बीमारी सबसे ज्यादा