नगर निगम के पास मौजूद आंकड़े के मुताबिक 25 वार्ड में करीब 599 मकानों को अवैध करार दे रखा है।
शिमला शहर के सैकड़ों लोगों को रिटेंशन पॉलिसी का बेसब्री से इंतजार है। अपनी जमीन पर बिना स्वीकृति के भवन बनाने पर ऐसे कई लोग फंसे हैं जिन्हें व्यवसायिक दरों पर बिजली और पानी के मासिक बिल चुकाने पड़ रहे हैं।
नगर निगम एरिया के न्यू मर्ज एरिया में ऐसे मकानों की संख्या कहीं अधिक है। नगर निगम के पास मौजूद आंकड़े के मुताबिक 25 वार्ड में करीब 599 मकानों को अवैध करार दे रखा है। प्रदेश सरकार की ओर से रिटेंशन पॉलिसी को हरी झंडी देने के बाद ऐसे भवन मालिकों को मकानों के नियमितीकरण की उम्मीद बढ़ गई है।
अगले सप्ताह तक इस मामले में अधिसूचना जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस फैसले के बाद लोग नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं और नियम तथा शर्तों के बारे में जानकारी चाह रहे हैं लेकिन नगर निगम उन्हें यह कह कर लौटा रहा है कि जब तक अधिसूचना जारी नहीं हो जाती तब तक वह इस बारे में कुछ नहीं बता पाएंगे।
भवनमालिकों को पूरी करनी होंगी ये औपचारिकताएं
अगले सप्ताह तक इस मामले में अधिसूचना जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इतना जरूर है कि ऐसे भवन मालिकों को शपथ पत्र देना होगा कि उन्होंने बिना नक्शे के काम किया और भविष्य में ऐसा नहीं होगा। इतना ही नहीं भवन मालिकों को मौजूदा समय के भवन का ताजा फोटो भी देने होंगे यह इसलिए लिए जा रहे हैं ताकि भविष्य में मकानों के साथ मालिक छेड़छाड़ न करे अगर वह ऐसा करता है तो उसे अवैध माना जाएगा नगर निगम उसे तोड़ देगा।
नगर निगम के वास्तु योजनाकार राजीव शर्मा ने बताया कि शिमला शहर में 599 मकान अवैध है। वर्ष 2006 के बाद जो इलाके नगर निगम के तहत आए हैं उन इलाकों में सबसे ज्यादा अवैध मकान घोषित किए गए हैं। रिटेशन पॉलिसी की अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।
रिटेंशन पॉलिसी पॉलिटिक्ल स्टंट : भाजपा
भाजपा उपाध्यक्ष रूपा शर्मा ने कहा कि भवन नियमितीकरण के लिए सरकार ने जो अध्यादेश जारी किया है, वह भ्रमित करने वाला है।
- फोटो : अमर उजाला
भवन नियमितीकरण के लिए सरकार ने जो अध्यादेश जारी किया है, वह भ्रमित करने वाला है। प्रेसवार्ता में यह बात भाजपा उपाध्यक्ष रूपा शर्मा ने कही। उन्होंने बताया कि शहर में बने साल 2002 से पहले भवनों को रिटेंशन पॉलिसी में न लाया जाए और न ही व्यवसायिक दरों पर बिजली पानी का भुगतान करें। बहुत से लोगों ने लोन लेकर मकान बनाए है।
ऐसे में इस तरह की पॉलिसी लाना लोगों के लिए भारी भरकम बोझ साबित होगा। लेकिन मौजूदा समय में लोगों को बिजली और पानी के कटने के डर के चलते कार्मिशयल रेट पर भुगतान करना पड़ रहा है। चुनाव नजदीक आने के कारण सरकार यह दाव पेंच खेल रही है। यह महज एक पॉलिटिक्ल स्टंट है।
पिछले कार्यकाल में भाजपा सरकार ने ही भवनों को नियमित करने के लिए रिटेंनशन पॉलिसी लाई है, लेकिन विपक्षी दल इस पॉलिसी के प्रति लोगों में भ्रामक प्रचार फैलाया। भवन नियमितीकरण को लेकर तीस फीसदी जगह कहां छोड़नी है, यह बात भवन मालिकों को समझ में नही है। क्योंकि भवन निर्माण के दौरान मकान मालिकों को इस पॉलिसी के बारे में पता नही था।
भाजपा ने 2002 के बाद अपनी जमीनों पर बनाए मकानों को तीस फीसदी वाले कानून लगाए जाने की बात कही है। उपाध्यक्ष ने कहा कि सरकार को यह अध्यादेश 45 दिनों में लागू करने की बात की है। उन्होंने दावा किया है कि कसुम्पटी के पांच वार्ड में शिमला ग्रामीण के दो और हाल ही में जो शिमला शहर में आए है इन पर अध्यादेश लागू करने पर भाजपा इसे खारिज करती है, एवं मांग करती है कि इस मामले पर नया अध्यादेश लाए और वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी लागू करे।