पर्यावरण में बदलाव के चलते रिंक में नहीं बन पाती बर्फ की ठोस परत, 2024 में महज 24 सत्र ही हुए
वर्ष 2023 में हुए थे स्केटिंग के 51 सत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक आइस स्केटिंग रिंक पर भी पर्यावरण का असर पड़ना शुरू हो गया है। तापमान में बढ़ोतरी के चलते रिंक में होने वाले स्केटिंग के सत्रों में भारी गिरावट आई है।
वर्ष 2023 में रिंक में 51 सत्र आयोजित हुए थे वहीं 2024 में यह संख्या घटकर केवल 21 रह गई। सत्रों में 58.82 फीसदी की कमी न केवल स्केटिंग प्रेमियों के लिए निराशाजनक है, बल्कि शिमला की पहचान को भी खतरे में डाल रही है। वर्ष
2023 में बर्फबारी का लगभग अभाव रहा जिससे स्केटिंग सत्रों के आयोजन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी रहीं। लेकिन 2024 में शिमला और आसपास के क्षेत्रों में अधिक बर्फबारी और खराब मौसम ने रिंक को बुरी तरह प्रभावित किया। बर्फ और बादल रिंक के ऊपर कंबल का काम करते हैं जिससे तापमान बढ़ने से रिंक में बर्फ नहीं जमती। बर्फबारी के अलावा दिन में गर्मी भी शिमला स्केटिंग रिंक की बर्फ को पिघला रही है। रिंक में दिसंबर के पूरे महीने शाम के समय केवल दो ही सत्र हो पाए हैं।
रिंक के चारों ओर छाया प्रदान करने वाले पेड़ों की कटाई का असर भी साफ दिख रहा है। पहले यह पेड़ बर्फ को तेज धूप से बचाते थे जिससे यह लंबे समय तक सुरक्षित रहती थी। अब छाया के अभाव में बर्फ जल्दी पिघलने लगी है जिससे सत्रों की संख्या घटी है। रिंक के पास स्थित रिवोली थियेटर के भवन को भी गिरा दिया। इस भवन के कारण रिंक में कम धूप पड़ती थी। अब रिंक में सीधी धूप पड़ने से बर्फ नहीं जम रही। मौसम विभाग की 2023 में जारी रिपोर्ट के अनुसार न्यूनतम तापमान में 1.5 सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है।
शाम को मौसम साफ रहना जरूरी : मल्होत्रा
आइस स्केटिंग रिंक के आयोजन प्रबंधक रजत मल्होत्रा ने बताया कि शाम को बादल और दिन में धूप से दिसंबर माह में सही तरीके से रिंक में बर्फ नहीं जम पाई। अच्छे तरीके से स्केटिंग करने के लिए शहर में दिन में कम तापमान और सूखी ठंड की जरूरत रहती है।