नमूने एकत्र करती भूवैज्ञानिकों की टीम
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उन्हें रजाणा गांव से 551 लाख वर्ष पुराना संसालीथिस नामक एक जीवाश्म मिला। इसके अतिरिक्त खुड द्राविल गांव से 512 लाख वर्ष पूर्व पुराने ट्रलोबाई कीडे़ को भी इस टीम ने खोज निकाला। भू-वैज्ञानिक डा. बीपी सिंह ने बताया कि रेणुका क्षेत्र के खुड व रजाणा गांव में वे दुर्लभ पत्थर हैं जो लाखों वर्ष पूर्व समुद्र में पाए जाते थे।
जिन पर जीवाश्म (कीड़े) के निशान आज भी हैं। इन्हें अन्य पांच प्रजातियों के पत्थर भी मिले हैं, जिनमें सैल, शिल्ट स्टोन, सैंड स्टोन, लाइम स्टोन व डोनामाइट शामिल हैं। पूरे भारत में सबसे अधिक पुराने व दुर्लभ पत्थर इसी क्षेत्र में दिखाई दिए हैं। टीम में बीपी सिंह के अतिरिक्त एमएससी की छात्रा निवेदिता डडवाल, मेघना, स्नेहा, संगीता शामिल रहीं।