कुलपति महावीर सिंह को ज्ञापन सौंपकर कर्मचारी संघों ने की रिक्त पद भरने की मांग
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शिक्षकों की भर्ती की तेज प्रक्रिया पर उठाए सवाल संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में गैर-शिक्षक कर्मचारियों के 450 पद खाली हैं। इसके बावजूद 75 स्वीकृत पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी है।
कार्यकारिणी परिषद सदस्य सुरेश कुमार वर्मा, कोर्ट सदस्य राजेश ठाकुर, चतुर्थ श्रेणी एवं तकनीकी कर्मचारी संघ के चेतराम बंसल और गैर-शिक्षक संघ विश्वविद्यालय के सदस्य नरेश ने बुधवार को कुलपति महावीर सिंह को ज्ञापन सौंपकर भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की।कर्मचारियों ने लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया। कर्मचारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय में गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भारी कमी है। इससे विभिन्न शाखाओं और विभागों का नियमित कामकाज प्रभावित हो रहा है।
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कर्मचारियों के अनुसार रिक्त पदों की संख्या करीब 450 तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया को अपेक्षित गति नहीं मिल रही है। कर्मचारियों ने हाल में 38 शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया तेज किए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि शिक्षकों की भर्ती को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं गैर-शिक्षक कर्मचारियों के 75 पद पहले ही स्वीकृत होने के बावजूद इनकी भर्ती लंबित है। कर्मचारियों ने इसे गैर-शिक्षक वर्ग की अनदेखी बताया।
कर्मचारियों के अनुसार 27 जून को हुई कार्यकारिणी परिषद की बैठक में गैर-शिक्षक स्टाफ के विभिन्न संवर्गों के 75 पद भरने की मंजूरी दी थी। इसके बावजूद इन पदों को भरने के लिए अभी तक प्रभावी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। कर्मचारियों ने छह पदों पर शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया का भी हवाला दिया। वित्त समिति ने पांच मार्च को छह पद भरने की अनुमति दी थी। जून में इन पदों की संख्या बढ़ाकर 18 की गई। इसके बाद 21 जुलाई को वित्त समिति ने संख्या बढ़ाकर 26 कर दी। इन 26 पदों का विज्ञापन जारी किया जा चुका है। कर्मचारियों ने कहा कि 26 पदों की भर्ती का विज्ञापन जारी हो सकता है तो 75 स्वीकृत पदों की भर्ती में देरी का कारण स्पष्ट होना चाहिए।
सभी गैर-शिक्षक संवर्गों से करें समान व्यवहार कर्मचारी नेताओं ने सभी गैर-शिक्षक संवर्गों के साथ समान व्यवहार करने की मांग की। उन्होंने वित्त समिति की बैठक परिसंचरण के बजाय नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि नियमित बैठकों से सभी संवर्गों के मामलों पर एक साथ चर्चा हो सकेगी। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि गैर-शिक्षक वर्ग की अनदेखी जारी रही तो विरोध तेज किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली के लिए पर्याप्त गैर-शिक्षक स्टाफ जरूरी है।