अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेजों को चलाने के लिए किए जा रहे डॉक्टरों के तबादलों से आईजीएमसी की मान्यता पर ही संकट मंडरा गया है। आईजीएमसी से कई बड़े डॉक्टरों के तबादले से यहां कई पद खाली हो गए हैं। ऐसे में सरकार के फैसले पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। पुराने कॉलेजों की मान्यता ताक पर रखकर नए कॉलेजों को चलाने के लिए डॉक्टर तैनात किए जा रहे हैं। यदि एमसीआई आईजीएमसी से यहां के डॉक्टरों का रिकॉर्ड चेक करे तो कई खाली पद मिलने के बाद इसे मान्यता तक रद्द कर सकती है।
आईजीएमसी के टीचिंग स्टाफ से सबसे अधिक दो बाल रोग विशेषज्ञों का तबादला नाहन मेडिकल कॉलेज के लिए कर दिया गया है। ये दोनों डॉक्टर एक साल तक नाहन में सेवाएं देंगे। वहीं, इस टीचिंग स्टाफ में एक डॉक्टर चार माह पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ऐसे में यह पद भी खाली चल रहा है। विभाग में जो दो डॉक्टर थे, अब उनके चले जाने से इस विभाग में समस्या और गंभीर हो गई है। ट्रांसफर किए गए सभी डॉक्टर दबी जुबान में खुद सरकार के इस फैसले पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो नए कॉलेजों में न जाने को लेकर कई डॉक्टर लॉबिंग में भी जुट गए हैं।
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नहीं दिया टीए और डीए
शिमला। डॉक्टर का दर्द इस बात से से भी बयां हो रहा है कि उन्हें ट्रांसफर तो कर दिया है लेकिन टीए और डीए जैसे लाभों से वंचित रखा जा रहा है।
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क्या कहते हैं आईजीएमसी सेमडिकोट के अध्यक्ष
आईजीएमसी सेमडिकोट के अध्यक्ष डॉ. राजेश सूद का कहना है कि सरकार को नए मेडिकल कॉलेज खोलने से पहले वहां के स्टाफ के बारे में ध्यान देना चाहिए था। सरकार अब डॉक्टरों को परेशान कर रही है जबकि पुराने कॉलेजों की मान्यता को लेकर भी संकट की स्थिति पैदा हो गई है। पहले भी जब मेडिकल कॉलेज खुला था तब भी उन्हें वहां दिखाया गया। इस साल भी उन्हें वहां के लिए भेजा गया है।