भारत में हर साल करीब 2.5 लाख सर्पदंश के मामले सामने आते हैं। इनमें लगभग 50000 पीड़ितों की मृत्यु हो जाती है। अभी तक जिला कुल्लू में सर्पदंश के दो मामले सामने आए हैं। सबसे अधिक जिला कांगड़ा में 760 मामले आए हैं। नेशनल 108 एंबुलेंस के हिमाचल प्रभारी मेहुल सुकुमारन ने कहा कि अकसर सर्पदंश के मामले जुलाई से लेकर नवंबर माह में होते हैं।
ऐसे मामलों से निपटने को 108 एंबुलेंस में सर्प विषरोधी दवाएं उपलब्ध हैं। यह मामला सामने आने पर पीड़ित को तत्काल दी जाती हैं। कहा कि सर्पदंश आमतौर पर दांतों का निशान, हल्की दर्द और उसके चारों तरफ त्वचा के लाल होने से पहचाना जा सकता है। यदि सर्पदंश वाली जगह के आसपास की त्वचा में अत्यधिक लचीलापन एवं सूजन है, तो यह सर्पदंश के लक्षण हो सकते हैं।
लाहौल-स्पीति में दो और कांगड़ा जिला में 760 लोगों को सांप ने डसा
बेहोशी, सांस लेने में तकलीफ, खून के धब्बे उभरना, पसीना आना इत्यादि भी सर्पदंश के सामान्य लक्षण हो सकते हैं। ऐसे मामले आने पर 108 आपातकालीन सेवा का लाभ उठाएं। मुश्ताक अहमद ने कहा कि 25 दिसंबर, 2010 से 31 जुलाई, 2016 तक प्रदेश में कुल 3425 मामले आए हैं।
इसमें बिलासपुर जिले में में 268, चंबा में 335, हमीरपुर में 377, कांगड़ा में 760, किन्नौर में 25, कुल्लू में 116, लाहौल-स्पीति में दो, मंडी में 395, शिमला में 350, सिरमौर में 220 , सोलन में 387 तथा जिला ऊना में 190 सर्पदंश के मामले सामने आए हैं।