अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के साथ सटे शांकली क्षेत्र में रहने वाले लोग आज भी एंबुलेंस सड़क से वंचित हैं। आपातकाल में लोगों को पांच सौ रुपये देकर कुली की मदद से मरीज को मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। कुली मरीजों को स्ट्रेचर और पीठ पर उठाकर सड़क पर खड़ी गाड़ियों तक पहुंचा रहे हैं।
मंगलवार सुबह 9:00 बजे शांकली के रहने वाले युवक को आईजीएमसी में उपचार के लिए ले जाना था। कोई भी मदद इसे सड़क तक पहुंचाने के लिए नहीं मिल रही थी। पड़ोसियों को फोन कर सूचित किया और कुली बुलाए गए। 9:20 मिनट पर कुलियों की मदद से युवक को सड़क तक पहुंचाया गया। इसके बाद गाड़ी में युवक को आईजीएमसी ले जाया गया।
ऐसा ही दूसरा मामला सुबह ग्यारह बजे हुआ। विमल की बेटी को फ्रेक्चर हुआ है। आसपास कोई व्यक्ति नहीं था, तो पिता ने पड़ोस में काम कर रही लेबर को बुलाकर युवती को सड़क तक स्ट्रेचर में लेटाकर पहुंचाया। यहां के भरत, निपुण राठौर, नरेश, विक्की ने बताया कि कई सालों से यहां पर एंबुलेंस सड़क नहीं बनी है। इसकारण आज भी लोगों को अपने मरीजों को स्ट्रेचर पर उठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ रहा है। लोगों ने मांग की है कि जल्द यहां पर सड़क बनाई जाएं। जो सड़क यहां बनी है वह अभी तक पास नहीं हो सकी है। ---
केस एक
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आने जाने के लिए कुली को दिए 1000 रुपये
शांकली के रहने वाले दीपक घर में गिर गए थे। आर्थो के डॉक्टरों ने मरीज का ऑपरेशन किया। मंगलवार को टांके खोले जाने थे। इसलिए डॉक्टर के पास जाना था। समस्या यह थी कि उन्हें घर से सड़क तक कौन उठाकर ले जाए? इसके बाद पड़ोसियों की मदद से कुलियों को बुलाया गया और कुलियों की मदद से सड़क तक पहुंचाया। आने जाने के खर्चे में कुल एक हजार रुपये कुलियों को दिए।
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केस दो
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पड़ोस में काम कर रही लेबर की मदद से ले गए सड़क तक
शांकली के रहने वाले विमल टंडन की बेटी तृप्ति टंडन के पीछे कुत्ते पीछे पड़ गए थे। इस अफरातफरी में तृप्ति अनियंत्रित होकर गई और पैर फ्रेक्चर हो गया। सुबह सवा ग्यारह बजे अस्पताल ले जाना था तो लोगों ने पैसा इकट्ठा कर स्ट्रेचर तो ले लिया लेकिन कुली नहीं मिल पाए। इसके बाद पड़ोस में काम कर रही लेबर को मदद के लिए बुलाया। चार मजदूर स्ट्रेचर उठाने के लिए आए। इसके बाद ही युवती को सड़क पर खड़ी गाड़ी तक पहुंचाया गया।
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केस तीन
पिछले साल भी गिरकर घायल हो चुके है कई लोग
पिछले साल भी कई मरीज गिरकर घायल हो चुके हैं। इसमें निपुण ठाकुर की मां किरण राठौर भी है। एंबुलेंस सुविधा न होने के कारण इन्हें भी कुलियों से सहायता लेने को लेकर हजारों रुपये खर्च कर चुके हैं। निगम यहां पर तुरंत एंबुलेंस सड़क मुहैया करवाए। ताकि, पांच मिनट के रास्ते के लिए मरीजों को पैसे न खर्च करने पड़े।