अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश हाईकोर्ट ने संजौली कॉलेज से ढली बाईपास सड़क के आसपास किए गए अवैध अतिक्रमण और अवैध निर्माणों का पता कर उन्हें तुरंत हटाने के आदेश पारित किए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने नगर निगम आयुक्त को आदेश दिए कि वह खुद इस सड़क मार्ग का निरीक्षण करें।
अगर लगता है कि कानून को ताक पर रखकर अवैध निर्माण किया गया है या किया जा रहा है तो इनके बिजली और पानी के कनेक्शन तुरंत काट दिए जाएं। हाईकोर्ट ने इन अतिक्रमणों को तुरंत प्रभाव से हटाने के आदेश भी पारित किए हैं। हाईकोर्ट ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक शिमला को न्यायालय के आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने निगम आयुक्त को आदेश दिए कि पांच जनवरी तक संजौली ढली बाईपास और ढली टनल से मशोबरा-कुफरी जंक्शन तक की कुल छह किलोमीटर सड़क का निरीक्षण कर बताएं कि उन मकान मालिकों के खिलाफ क्या कार्यवाई की गई जो नियमों के खिलाफ इन सड़कों के आसपास अवैध निर्माण में लगे हुए हैं।
कोर्ट ने लोनिवि के अधीक्षण अभियंता के शपथ पर नाराजगी जताते हुए कहा कि संजौली-ढली बाईपास सड़क के आसपास के अवैध निर्माणों की जानकारी नहीं दी गई है। कोर्ट ने इस सड़क से जुड़ा तमाम रिकॉर्ड एनएचएआई को सौंपने के आदेश भी दिए। कोर्ट ने संबधित अधिकारियों से यह स्पष्ट करने के आदेश भी दिए कि क्या इन सड़कों के आसपास सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे किए गए हैं। क्या भूमि मालिकों ने सड़क से उचित दूरी पर कानूनन निर्माण किया है या किया जा रहा है। क्या सड़क के दोनों ओर जो भवन बने हैं, वे स्वीकृत नक्शों और नगर निगम कानूनों में बनाए गए हैं या बनाए जा रहे हैं।
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76 स्थानों पर अतिक्रमण की रिपोर्ट
अधीक्षण अभियंता राष्ट्रीय उच्च मार्ग वृत्त शिमला ने शपथ पत्र के माध्यम से न्यायालय को बताया कि अभी तक इस सड़क पर 76 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं और अतिक्रमण चिन्हित किए जाने बाकी हैं। न्यायालय ने कहा कि ये सड़क देश के बॉर्डर से जुड़े हुए हैं और व्यवसाय तथा पर्यटन की दृष्टि से अहम है। दो जिलों की पूरी अर्थव्यवस्था जुड़ी हुई है। इस कारण इन पर बिना रोकटोक यातायात की आवाजाही होना जरूरी है। इसके अलावा शिमला प्रदेश की राजधानी है और प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान के लिए इन्हीं सड़क मार्गों के माध्यम से आना जाना संभव है। इस तरह के सड़क मार्गों के आसपास किसी भी तरह के अतिक्रमण और अवैध निर्माण को सहन नहीं किया जा सकता। मामले पर सुनवाई 5 जनवरी को निर्धारित की गई है।