एमसी ने तैयार की ढारों में रहने वाले गरीब परिवारों की सूची
सरकार की अधिसूचना जारी होने पर मिलेगी राहत
दो विस्वा तक जमीन पर मिलना है हक
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश सरकार की ओर से झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले गरीब परिवारों को मालिकाना हक देने के फैसले से राजधानी में 3008 परिवारों को राहत मिलेगी। नगर निगम प्रशासन ने शहर में ढारों में रह रहे गरीब परिवारों की क्षेत्रवार सूची तैयार कर ली है।
सरकार की ओर से अधिसूचना जारी होने के बाद इन्हें भी नियमानुसार मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। शहरी विकास विभाग की ओर से जारी होने नियमों को ही नगर निगम भी लागू करने जा रहा है। निगम प्रशासन की ओर से तैयार की रिपोर्ट के अनुसार शहर में इन 3008 परिवारों का करीब पांच हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा है।
रिपोर्ट के अनुसार कृष्णानगर में सबसे ज्यादा 1137 ढारे हैं। सर्कुलर रोड से नीचे लालपानी तक कई जगह कच्चे ढारे बने हैं। ईदगाह कालोनी में 345, शिव कालोनी में 100, तिब्बतीयन कालोनी में 99 गरीब परिवारों के ढारे बने हैं। शहर के बाकी क्षेत्रों में भी गरीब परिवारों के ढारे हैं। सरकार ने झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले ऐसे लोगों को दो विस्वा तक जमीन का मालिकाना हक देने का फैसला लिया है।
महापौर सत्या कौंडल ने कहा कि प्रदेश सरकार के इस फैसले से राजधानी के हजारों परिवारों को फायदा होना है। इस बारे में निर्देश मिलने के बाद इन परिवारों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
कृष्णानगर में सबसे ज्यादा गरीब : रजनी
कृष्णानगर से पूर्व भाजपा पार्षद रजनी सिंह ने कहा कि उनके वार्ड में गरीब परिवारों की संख्या सबसे ज्यादा है। ढारों में रह रहे इन परिवारों को सालों से बेदखली का डर सता रहा था। शहर की सफाई से लेकर कई अहम कामों को इस क्षेत्र के लोग करते हैं। अब इन्हें मालिकाना हक मिलेगा। कहा कि उनके वार्ड के एक हजार से अधिक परिवारों को इसका फायदा मिलने वाला है।