मगर इसके बावजूद निजी विश्वविद्यालयों के प्रबंधकों ने बड़ी चालाकी से करोड़ों के छात्रवृत्ति घोटाले को अंजाम दे दिया। अब केंद्रीय जांच एजेंसी यह देख रही है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस बात की जानकारी थी या नहीं।
ऐसा तो नहीं कि जानबूझ कर पोर्टल की कमियों को नजरअंदाज किया गया जिससे निजी विश्वविद्यालयों को घोटाला करने में मदद मिले। ऐसे में आने वाले दिनों में शिक्षा विभाग के तत्कालीन अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।
पोस्ट मैट्रिक और प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति के नाम पर हुए इस घोटाले में शिक्षा विभाग ने केंद्र सरकार के उन आदेशों की भी अवहेलना की जिसमें छात्रों को छात्रवृत्ति की राशि स्मार्ट कार्ड के माध्यम से दी जानी थी। मगर विभाग ने इन आदेशों को अनदेखा किया, जिससे हजारों छात्रों की छात्रवृत्ति हड़प ली गई।