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अब जल्द धरातल पर उतरेगा 24 घंटे पानी देने का प्रोजेक्ट

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प्रोजेक्ट के सिस्टम इंप्रूवमेंट प्लान को दी मंजूरी
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दो साल से इसी प्लान के चलते शुरू नहीं हो पाया है काम
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहरवासियों को 24 घंटे पेयजल सुविधा देने के लिए तैयार किए सतलुज वाटर प्रोजेक्ट के जल्द धरातल पर उतरने की उम्मीद बढ़ गई है। कंपनी के निदेशक मंडल ने इस प्रोजेक्ट के सिस्टम इंप्रूवमेंट प्लान (एसआईपी) को शुक्रवार को सैद्घांतिक मंजूरी दे दी। इस प्लान को मंजूरी न मिलने से अभी तक प्रोजेक्ट का काम शुरू नहीं हो पाया है।
हाल ही में विश्व बैंक ने भी काम में देरी पर पेयजल कंपनी को फटकार लगाई थी। इस प्रोजेक्ट का टेंडर करीब दो साल पहले अवार्ड हो चुका है। टेंडर लेने वाली कंपनी को काम शुरू करने से पहले इस प्रोजेक्ट का सिस्टम इंप्रूवमेंट प्लान देने को कहा था। प्लान में कंपनी को बताना है कि कैसे शकरोड़ी से सतलुज का पानी शिमला पहुंचाया जाएगा। कंपनी ने सर्वे करने के बाद इसका प्लान तैयार किया। लेकिन इसमें लागत राशि टेंडर राशि से कहीं ज्यादा थी। पेयजल कंपनी के अनुसार इस प्रोजेक्ट का टेंडर करीब 371 करोड़ में अवार्ड किया गया था लेकिन ठेकेदार कंपनी के दिए प्लान में इसकी लागत करीब 550 करोड़ दिखाई गई। इसे मंजूरी नहीं दी गई। ठेकेदार कंपनी को दोबारा प्लान बनाने को कहा था जिसे अब निदेशक मंडल की बैठक में रखा गया। हालांकि अभी भी इस प्लान में कुछ कमियां हैं, जिसे एक हफ्ते में पूरा करने को कहा है। स्वतंत्र निदेशक दिग्विजय चौहान ने कहा कि प्लान में ज्यादातर बिंदुओं पर सहमति बनने के बाद इसे सैद्घांतिक मंजूरी दी है। बैठक में मेयर सत्या कौंडल, डिप्टी मेयर शैलेंद्र चौहान और आयुक्त आशीष कोहली भी मौजूद रहे।
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पंचायती क्षेत्र में रेट तय करने को बनाई कमेटी
बैठक में पंचायती क्षेत्र की पेयजल दरें शहर के बराबर करने को लेकर भी चर्चा हुई। इस पर नये सिरे से कमेटी बनाई है जो तय करेगी कि पंचायती क्षेत्र में पेयजल दरें क्या रखी जाए। अभी पंचायती क्षेत्र में कंपनी के 933 उपभोक्ता हैं। इन्हें शहर की तुलना में लगभग दोगुना दरों पर पानी सप्लाई होता है।
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एक दिन पहले भेजा 506 पेज का एजेंडा
छह महीने बाद हुई पेयजल कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक का इस बार 506 पेज का लंबा चौड़ा एजेंडा बनाया था। लेकिन नगर निगम महापौर, उप महापौर, आयुक्त को बैठक से ठीक एक दिन पहले वीरवार शाम यह एजेंडा मिला। बीओडी के ज्यादातर सदस्य इसे पढ़ तक नहीं पाए। बैठक में गिरि परियोजना की पाइपलाइन फटने से ग्रामीण क्षेत्रों में हुए नुकसान की भरपाई करने, ऑडिट रिपोर्ट, पिछली बैठक के कार्यवृत्तों को भी मंजूरी दी गई।
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