सूबे में क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण की ओर से चिह्नित ब्लैक स्पॉट्स पर अधिक हादसे हो रहे हैं। सबसे ज्यादा हादसे जिला कांगड़ा और शिमला में हो रहे हैं। सरकार और परिवहन विभाग हादसों पर नियंत्रण रखने में नाकाम रहे हैं। आरटीए ने प्रदेश में 615 ब्लैक स्पॉट्स चयनित गए हैं। इनमें 216 ब्लैक स्पॉट पर अधिकतर हादसे हो रहे हैं।
बिलासपुर में 12, चंबा 19, हमीरपुर 13, कांगड़ा 39, किन्नौर तीन, कुल्लू 17, लाहौल-स्पीति तीन, मंडी 28, शिमला 30, सिरमौर 17, सोलन 21 और ऊना में 14 ब्लैक स्पॉट हैं। अधिकतर ब्लैक स्पॉट पर न तो रेलिंग और न ही पैरापिट हैं।
सड़क हादसों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो हादसों का ग्राफ साल दर साल बढ़ रहा है। वर्ष 2013 में 6 हजार 650 लोग सड़क हादसों में जांच गंवा चुके हैं। 2014 में यह संख्या 8 हजार 858 और वर्ष 2015 में 8,875 पहुंच गई है।
ऐसे रोके जा सकते हैं हादसे
चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर चेतावनी बोर्ड लगाना। ब्लैक स्पॉट से पहले स्पीड ब्रेकर लगाना, सड़क किनारे पहाड़ी होने पर रेलिंग या पैरापिट लगाना। जहां तक संभव हो सके ब्लैक स्पॉट्स पर यातायात पुलिस तैनात करना। खस्ताहाल सड़कों की हालत सुधारना।
अधिकतर सड़क हादसे आरटीए के चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर हो रहे हैं। इनका कारण तेज रफ्तार, नशे का सेवन कर वाहन चलाना और सड़कों की खस्ताहालत है। - मेहुल सुकुमारन, स्टेट हेड आपातकालीन 108 एंबुलेंस हिप्र