इन दो जगहों पर गांव वालों की बीघों के हिसाब से जमीनें हैं और इनके 100 से भी अधिक हिस्सेदार हैं। 28 जनवरी 2017 को तकसीम के लिए आवेदन किया। इसके बाद पता चला कि मालिकाना हक किसी और के नाम हो गया है। यह अकेले उनके साथ नहीं कई हिस्सेदारों के साथ हुआ है।
यह सब तत्कालीन राजस्व अधिकारी और कर्मचारियों की वजह से हुआ है क्योंकि जब उनसे उस समय बात की गई तो उन्होंने कहा कि तकसीम हो गई अब बाद में तबादला करवा लेना। उन्होंने जमीन के दस्तावेज हासिल किए तो हैरान रह गए।
जमीन का न ही वह ततीमा था और न ही खसरा नंबर था। ततीमा से ही पता चला कि अब जमीन कहीं और है और यह किसी और नंबर पर चढ़ा दी है। इस खुलासे के बाद कई हिस्सेदारों ने इस पर आपत्ति जता दी है और उपायुक्त को भी लिखित में शिकायत दे दी है।
हिस्सेदारों ने उपायुक्त से अपील की है कि जब तक इंतकाल को रद्द न किया जाए तब तक जमीन के इन खाता नंबरों की रजिस्ट्री करने पर तत्काल रोक लगा दी जाए। न ही इन खाता नंबरों पर ऋण लेने की स्वीकृति दी जाए।
राजस्व महकमे की वजह से दर्जनों हिस्सेदारों को परेशानी में डाल दिया है। इसके पीछे जो भी उनके खिलाफ कार्रवाई हो। डीसी शिमला अमित कश्यप ने कहा कि शिकायतपत्र को पढ़ने के बाद सभी तथ्य जांचें जाएंगे। आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसमें अगर किसी की लापरवाही पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई होगी।