टैगोर छात्रावास के बोर्डर तेजिंद्र नेगी और श्रीखंड छात्रावास के विक्की दिवाली के रोज छत पर बैठे थे। इसी बीच वहां टंकी के पास लंगूरों ने शोर मचाया तो इन्होंने जाकर देखा। टंकी का ढक्कन खुला था और तेज दुर्गंध आ रही थी।
इस पर अंदर देखा तो बंदर पड़ा हुआ था। छात्रों ने कहा कि उन्होंने इसकी सूचना वार्डन को दे दी थी लेकिन अवकाश होने के कारण वीरवार को बंदर को सफाई कर्मी ने बाहर निकाला।
हेमराज और सतीश नेगी, रितेश ने कहा कि यह सरेआम छात्रों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। उन्होंने विवि से मांग की कि पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ ही टंकियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करें।
छात्रों के स्वास्थ्य की करवाएं जांच : ठाकुर
एसएफआई की विवि इकाई के अध्यक्ष विक्रम सिंह ठाकुर ने मांग की है कि छात्रावास में रहने वाले जिन छात्रों ने इस पानी को प्रयोग किया है, उनके स्वास्थ्य की जांच करवाई जाए। श्रीखंड सहित सभी छात्रावासों की टंकियों की सफाई करवाएं और उसमें दवाई आदि डालें।
विवि के चीफ वार्डन प्रो. नैन सिंह ने कहा कि बुधवार को उन्हें टंकी में बंदर पड़ा होने की सूचना मिली। इस पर वार्डन और निर्माण विंग के एक्सईएन को बोलकर बंदर निकलवा कर पानी निकालने के बाद उसमें दवाई डाल दी है।
टंकियों में ताले लगे होते हैं लेकिन छात्र ही उन्हें निकाल देते हैं। एक्सईएन को सभी छात्रावासों की टंकियों की सफाई और उसमें दवाई आदि डालने को कह दिया है।
पीलिया और फूड प्वॉयजनिंग का खतरा
डॉक्टर राकेश शांडिल ने कहा कि ऐसे पानी के इस्तेमाल से डायरिया और फूड़ प्वॉयजनिंग जैसी बीमारी हो सकती है। इस तरह के कोई भी लक्षण नजर आए तो तुरंत अस्पताल आकर छात्रों को उपचार करवा लेना चाहिए।