हिमाचल प्रदेश राज्य वॉलीबाल संघ की तरफ से ऊना में खेली जा रही राज्य स्तरीय वॉलीबाल प्रतियोगिता में खेलने गई इंदिरा गांधी खेल परिसर शिमला की पुरुष वर्ग की टीम बिना खेले लौट आई। चूक चाहे जिस स्तर पर हुई हो लेकिन इसका खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ा। वॉलीबाल संघ ने पंचायतीराज मंत्री एवं वॉलीबाल संघ के अध्यक्ष की अनुमति के बावजूद स्पर्धा में टीम को शामिल नहीं किया। इसमें कहीं न कहीं संघ के अध्यक्ष मंत्री और वॉलीबाल संघ तथा युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के आपसी तालमेल की कमी नजर आ रही है।
खिलाड़ियों का कहना है कि हमारा क्या कसूर, रोहड़ू में मंत्री ने टीम के उपविजेता रहने पर मंच से टीम को प्रतियोगिता में सीधे खेलने को एंट्री देने की घोषणा की थी। संघ के अध्यक्ष होने के नाते मंत्री ने घोषणा की थी, इस पर खेल परिसर में उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए अभ्यास किया। अंत में उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। खिलाड़ियों ने कहा कि हम इससे हतोत्साहित हुए हैं।
टीम को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सीधे एंट्री देने को लेकर रोहड़ू में घोषणा के बाद 17 दिसंबर को पंचायतीराज मंत्री एवं हिमाचल प्रदेश वॉलीबाल संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र कंवर ने अनुमति पत्र उपनिदेशक युवा सेवाएं एवं खेल विभाग शिमला को दिया था। इसमें महिला और पुरुष दोनों टीमों को अनुमति दी थी। उपनिदेशक सुबोध रमोल ने ई मेल से मिले इस अनुमति पत्र का हवाला देते हुए 18 दिसंबर को खेल परिसर के वॉलीबाल कोच को पुरुष वर्ग की टीम को 19 से 21 दिसंबर तक होने वाली राज्य स्तरीय वॉलीबाल प्रतियोगिता के लिए लेकर जाने के आदेश जारी किए थे।
उपनिदेशक खेल परिसर ने मांगी थी अनुमति
वॉलीबाल की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में खेल परिसर की टीम को सीधे प्रवेश देने के लिए अनुमति उपनिदेशक युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के इंदिरा गांधी खेल परिसर ने संघ के अध्यक्ष से मांगी थी। इसमें खेल परिसर के कोच की ओर से मिले आग्रह का हवाला दिया था। इसमें कोच ने टीम को अलग यूनिट के रूप में खेलने और संबद्धता प्रदान करने का आग्रह किया था। इस अनुमति पत्र की प्रति भी अध्यक्ष को भेजी थी। इसी पर अध्यक्ष ने 17 दिसंबर को उपनिदेशक को अनुमति पत्र ई मेल से भेजा।