शिमला। आईजीएमसी की आर्थो ओपीडी में इलाज करवाने आए मरीज मंगलवार को परेशान रहे। ओपीडी में पहले तो पर्चियां ली गई। लेकिन थोड़ी देर बाद ओपीडी में पर्चियां न लेने का फरमान जारी हो गया। कहा गया कि जो मरीज लाइन में खड़े हैं, उन्हें ही पर्ची लेकर ओपीडी में आने दिया जाएगा।
जबकि बाकी के मरीज पर्ची पर नंबर लगाने की बात कहते नजर आए। कुछ देर में एक ओर फरमान जारी हुआ कि ओपीडी में नयी पर्चियां नहीं ली जाएंगी। ऐसे में दूरदराज के क्षेत्रों से इलाज करवाने आए मरीज गुस्सा गए और ओपीडी की लाइनों में बैठकर इलाज करवाने के लिए अड़े रहे।
मामला मंगलवार का है। आर्थो की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी थी। कुछ ही देर में ओपीडी का सिस्टम गड़बड़ा गया। वहीं स्टाफ से मरीजों ने सिस्टम में बदलाव की बात पूछी तो सही जवाब नहीं दिया गया। कहा गया कि जिन मरीजों के हाथों में पर्चियां है। वह लाइनों में ओपीडी आते रहे।
ऐसे में बाकी के मरीज ने पर्चियाें पर नंबर न लगने का विरोध किया। उधर, ठियोग से पांव में चोट की समस्या को लेकर पहुंचे इंद्र सिंह व टांग में दर्द को लेकर नोहरा से आए देवेंद्र ने कहा कि अस्पताल में सिस्टम गड़बड़ है। डेढ़ सौ से अधिक मरीज ओपीडी के बाहर खड़े है। लेकिन ओपीडी में पर्ची न लिए जाने के कारण उन्हें परेशान होना पड़ रहा है।
अभी राष्ट्रपति के कार्यक्रम में हूं
अभी मैं राष्ट्रपति के कार्यक्रम में हूं। मामले की पूरी जानकारी नहीं है। आकर ही मामले पर कुछ कह सकूंगा। - डॉ. जनक राज,- वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी
नहीं है टोकन सिस्टम
ओपीडी में अभी तक टोकन सिस्टम भी नहीं लगा है। जबकि बाकी ओपीडी में मरीजों की पर्चियों पर नंबर डालने के बाद टोकन सिस्टम के तहत मरीजों को ओपीडी में इलाज के लिए बुलाया जाता है।
मेडिसन ओपीडी में भी चरमराई व्यवस्था
मेडिसन ओपीडी में मरीजों से पर्ची तो ले ली गई। लेकिन बाद में कहा गया कि आपका नंबर दो सौ से ऊपर है। इसलिए आप दोपहर बाद ओपीडी में आए। जबकि वरिष्ठ डॉक्टर की ओपीडी में दोपहर तक करीब साठ व उससे अधिक मरीज देखे गए थे।