हिमाचल समेत देश के तमाम राज्यों में पंचायतों का फंड का तरीका बदल सकता है। यह जानकारी 15वें वित्तायोग के अध्यक्ष एनके सिंह ने दी है। ‘अमर उजाला’ के सवाल पर सिंह ने कहा कि यह मांग मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की ओर से भी उठाई गई है। इस पर पंचायत प्रतिनिधियों से चर्चा हुई है।
यह मामला केवल हिमाचल में ही नहीं उठा है। हिमाचल दसवां राज्य है, जहां हम आए हैं। इससे पहले हम जिन नौ राज्यों में गए, उनमें भी यह मसला हमारे सामने उठाया गया है। पंचायतों की त्रिस्तरीय प्रणाली ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के लिए बजट देने की मांग उठी है।
त्रिस्तरीय प्रणाली के बारे में सोचना हमारा सांविधानिक दायित्व है। बजट के आनुपातिक आवंटन के मुद्दे पर विचार होगा। 14वें वित्तायोग की सिफारिशों के बाद केंद्र से आया सारा पैसा ग्राम पंचायतों को भेजा जाता है। जिला परिषदों और पंचायत समितियों को कोई बजट नहीं दिया जाता। इनका वित्तपोषण राज्य सरकारें ही करती हैं। इससे पहले आनुपातिक बंटवारा होता था।