केलांग (लाहौल-स्पीति) में बर्फबारी के कारण सेब, आलू और सब्जी के फसलों को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचा है। कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि बर्फबारी से हुए नुकसान की रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जा रही है। धर्मपुर (मंडी) में मूसलाधार बारिश ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। किसानों की धान की फसल भारी वर्षा के कारण खराब हो गई है।
इस बार किसानों को धान की बंपर फसल होने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। किसानों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जो नुकसान किसानों को धान की फसल का हुआ है उसका आकलन करके उचित मुआवजा दिया जाए। क्षेत्र के बहरी रोपा में किसानों की धान की फसल पूरी तरह से खराब हो गई है।
किसानों विचित्र सिंह, प्रेम सिंह, संजय कुमार, भागमल, कै. तुलसी राम, शोभा राम, काहन सिंह, ओमचंद, मानसिंह, चेतराम, जगतराम, हीरा सिंह, रूप सिंह, प्यार चंद, प्रेम सिंह, रूपलाल, लेखराज इत्यादि ने सरकार से मांग की कि वर्षा के कारण खराब हुई फसल का मुआवजा दिया जाए। कृषि विभाग धर्मपुर के कृषि विशेषज्ञ डॉ. रणजीत वर्मा ने कहा कि किसानों की धान की फसल को भारी वर्षा से नुकसान हुआ है। विभाग किसानों के नुकसान का आकलन करके रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को जल्द भेज दी जाएगी।
गोहर (मंडी) में भारी बारिश के बाद सराज और नाचन के हजारों किसानों की आर्थिकी की रीढ़ मटर और टमाटर की फसल रोग की चपेट में आ गई है। मटर की फसल को पीला रतुआ और टमाटर लेट ब्लाइट रोग की चपेट में आ गए हैं।
इससे हजारों किसानों में हड़कंप की स्थिति है। मूसलाधार बारिश के क्रम ने नाचन और सराज की दर्जनों पंचायतों में बेमौसमी मटर की फसल को लाखों का नुकसान पहुंचाया है। किसानों के खेतों में मटर की फसल तबाह हो गई है।
कृषि विभाग का दावा है कि मटर की फसल को करीब 20 से 30 फीसदी नुकसान हुआ है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो भारी बारिश के कारण मटर को पीला रतुआ और टमाटर को लेट ब्लाइट रोग लग सकता है।
नाहन/सराहां (सिरमौर) में मूसलाधार बारिश ने जिले में किसानों-बागवानों की रीड़ तोड़ दी है। जिले में हुई मूसलाधार बारिश से तीन दिनों में ही 30 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। जबकि, अब तक की बरसात में यह नुकसान करोड़ों तक पहुंच गया है। तीन तक हुई बारिश से जिले के लगभग दो दर्जन पॉलीहाउस तबाह हो गए हैं।
जबकि, मक्के और टमाटर की फसल को भी भारी क्षति हुई है। अकेले बागवानी विभाग को ही करीब दस लाख रुपये का नुकसान होने की आशंका है। पच्छाद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों में फसलों को सबसे अधिक क्षति हुई है।
राजगढ़, हरिपुरधार, शिलाई और संगड़ाह क्षेत्र में भी फसलों को नुकसान पहुंचा है। पच्छाद के तहत बनाहं धींनी, बजगा, बागथन, लाना बांका, नैनाटिक्कर, डिलमन, काटली, जामन की सैर और सुरला जनोट इत्यादि पंचायतों में बीजी गई टमाटर की नकदी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं, मक्के की तैयार फसल भी तहस-नहस हो गई है।
इसके अलावा कई पॉली हाउसों को भी इस वर्षा से नुकसान पहुंचा है। टमाटर की फसल खेतों में ही बिछ जाने के कारण किसानों की कमर टूट गई है। काटली पंचायत के पूर्व प्रधान देवेंद्र भंडारी, किसान गणेश दत्त शर्मा, भूपेंद्र शर्मा, राजेश कुमार, शमशेर ठाकुर, सतीश ठाकुर, सुरेंद्र कुमार, बलबीर सिंह, देशराज और वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके गांव में लगाई गई टमाटर की फसलें भारी वर्षा के कारण बरबाद हो गई हैं।
जिन लोगों ने बेमौसमी टमाटर की फसल लगाई थी, वह भी अधिकतर नष्ट हो गई है। बंजान निवासी सतीश ठाकुर ने बताया कि इस वर्षा से उनके पांच सौ स्कवेयर मीटर ग्रीन हाउस पर चीड़ का पेड़ टूटने से ग्रीनहाउस टूट गया है। वहीं, उसमें लगी शिमला मिर्च की फसल को भी नुकसान हुआ है। उधर, तहसीलदार पच्छाद गुरमीत सिंह नेगी ने बताया कि भारी वर्षा से जो भी नुकसान हुआ है, उसकी सूचना पटवारी को दी जाएगी। नुकसान का मौका मुआयना किया जाएगा।