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कर्मचारियों और कंपनी के बीच बढ़ा विवाद

Mon, 24 Jun 2019 11:27 AM IST
शिमला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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सांकेतिक तस्वीर
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शिमला। शहर में पेयजल व्यवस्था संभाल रही शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड कंपनी और इसके कर्मचारियों के बीच विवाद और बढ़ गया है। आईपीएच के इन 180 कर्मचारियों ने अब काम करने से ही इंकार कर दिया है। कर्मचारियों ने कंपनी, आईपीएच विभाग और सरकार को सात दिन का समय दिया है। यदि मांगें पूरी न हुईं तो इस हफ्ते से शहर के लिए पानी की सप्लाई ठप हो सकती है।

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कंपनी के अधीन काम करने से इंकार कर रहे कर्मचारियों को अब भारतीय मजदूर संघ का भी समर्थन मिल गया है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें कंपनी के खाते से नहीं बल्कि ट्रेजरी से तनख्वाह चाहिए। लेकिन कंपनी गुपचुप तरीके से ट्रेजरी से उनके बैंक खातों की डिटेल लेकर उन्हें तनख्वाह जारी कर रही है। कर्मचारियों को कंपनी से तनख्वाह नहीं चाहिए।

कंपनी जबरदस्ती तनख्वाह देकर उन्हें अपना कर्मचारी बना रही है। इसके खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। आईपीएच कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष मदन राणा ने कहा कि हमारे कर्मचारी खुद कंपनी में नहीं गए बल्कि जबरदस्ती उन्हें कंपनी में डाला जा रहा है। यह मंजूर नहीं होगा। कर्मचारियों की मांगें पूरी न हुई तो आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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हम सरकार के कर्मचारी, कंपनी के नहीं
दो महीने से बिना तनख्वाह के काम कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि वह आईपीएच विभाग के कर्मचारी हैं जो अब तक नगर निगम में सेवाएं दे रहे थे। जब कंपनी बनी तो उनसे यह तक नहीं पूछा गया कि उन्हें कंपनी में काम करना भी है या नहीं। सरकारी विभाग में काम कर रहे कर्मचारियों को जबरदस्ती कंपनी में डाल दिया गया। अब जब विरोध हुआ तो कंपनी कर्मचारियों से पूछ रही है कि उन्हें कंपनी में काम करना है या वापस आईपीएच विभाग जाना है।

कर्मचारियों के साथ कोई जबरदस्ती नहीं की जा रही। कर्मचारी कंपनी से तनख्वाह नहीं चाहते। इनके विरोध के चलते अभी इन्हें तनख्वाह जारी नहीं की है। -धर्मेंद्र गिल, प्रबंध निदेशक शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड कंपनी

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