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आबकारी एवं कराधान नीति में संशोधन करवाए प्रदेश सरकार

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अमर उजाला ब्यूरो
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शिमला। शिमला होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से आबकारी एवं कराधान नीति की समीक्षा कर इसमें संशोधन की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सूद ने मुख्यमंत्री से बढ़े हुए शराब लाइसेंस शुल्क और कोटा प्रणाली को पूरी तरह खत्म करने का आग्रह किया है।
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सूद ने बताया कि आबकारी एवं कराधान नीति के संशोधित प्रावधानों में बार की लाइसेंस फीस में भारी बढ़ोतरी की है। सालाना अनिवार्य कोटा 148 पेटी से बढ़ाकर 375 पेटी हो गया है। बार संचालकों के लिए यह दोनों शर्तें पूरी करना मुश्किल हो रहा है। बीते सात सालों में आबकारी महकमे ने लाइसेंस फीस में 700 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। 2013-14 में लाइसेंस शुल्क 55,000 रुपये था जो 2018-19 के लिए बढ़ाकर 2,50,000 रुपये कर दिया है। इतना ही नहीं पूरे साल की लाइसेंस फीस वसूलने के साथ 10 फीसदी सिक्योरिटी भी साल के शुरू में वसूली जा रही है। सालाना न्यूनतम उठान कोटा 2014-15 में 222 पेटी था जो 2019-20 में बढ़ कर 375 पेटी हो गया है। बीते साल एक भी बार संचालक निर्धारित कोटा नहीं उठा पाया। न्यूनतम कोटा न उठाने पर एक लाख से छह लाख रुपये तक जुर्माने के साथ बार लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान किया है। बार संचालक को शराब केवल निकटतम एल-2 दुकानों से खरीदनी पड़ रही है। संजय ने बताया कि होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसियेशन का प्रतिनिधिमंडल इस मामले में राहत के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से पहले भी मिल चुका है। मुख्यमंत्री ने चुनाव के बाद आबकारी नीति के प्रावधानों में राहत दिलाने का आश्वासन दिया था। होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन मुख्यमंत्री से अपील करती है कि आबकारी एवं कराधान नीति में संशोधन कर हजारों कारोबारियों को राहत दिलाएं।
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यह है एसोसिएशन की मांगें
वार्षिक लाइसेंस शुल्क में की जाए कमी
न्यूनतम उठान कोटे की शर्त खत्म की जाए
क्षेत्र और स्थान के आधार पर तय न हो उठान कोटा
एल-1 इकाई से शराब उठाने की दी जाए छूट
खत्म हो कोटे पर अनुचित जुर्माने का प्रावधान
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